मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार के लिए विभागीय समन्वय और नियमित निगरानी पर दिया जोर
गुमला, 11 जुलाई। महिला एवं बाल विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित ‘जीवन परियोजना’ के एक वर्ष की प्रगति एवं आधारभूत सर्वेक्षण प्रतिवेदन की समीक्षा को लेकर शनिवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी, विभिन्न बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारी तथा एकजुट संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक में परियोजना के तहत पिछले एक वर्ष में संचालित गतिविधियों, उनके प्रभाव तथा आधारभूत सर्वेक्षण के निष्कर्षों की विस्तृत समीक्षा की गई। उपायुक्त ने कहा कि टाटा ट्रस्ट के सहयोग से जुलाई 2025 से जिले में संचालित यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म से छह वर्ष तक के बच्चों तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने बताया कि समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) एवं स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को पोषण, बाल विकास एवं वृद्धि निगरानी का प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही संयुक्त गृह भ्रमण, ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के आयोजन, सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिकाओं की स्थापना जैसे नवाचारात्मक कार्य भी किए जा रहे हैं।
बैठक में द जॉर्ज इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार आधारभूत सर्वेक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों एवं माताओं के पोषण, स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार, जागरूकता के स्तर तथा सुधार की संभावनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य साझा किए गए। साथ ही परियोजना के अगले चरण में विभागीय समन्वय को और मजबूत करने तथा समुदाय की सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण की चुनौती से निपटने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार में एकजुट संस्था सराहनीय कार्य कर रही है। वहीं डुमरी की महिला पर्यवेक्षिका ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की लंबाई के सटीक मापन के लिए इन्फैन्टोमीटर उपलब्ध कराने का सुझाव दिया।
बैठक में यह भी बताया गया कि एकजुट संस्था के सहयोग से पोषण पुनर्वास केंद्र (एमटीसी) में कुपोषित बच्चों के नामांकन में वृद्धि हुई है। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को जीवन परियोजना के उद्देश्यों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बेहतर समन्वय एवं नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में अपेक्षित सुधार लाया जा सके।























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