उच्च विद्यालय की बदहाली पर उठे सवाल, अभिभावकों ने नए भवन व शिक्षकों की मांग की
कुंदा (चतरा): प्रखंड स्थित बौधाडीह उच्च विद्यालय की जर्जर स्थिति सरकारी शिक्षा व्यवस्था के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। विद्यालय भवन पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
विद्यालय के छात्रों और अभिभावकों ने बताया कि कक्षाओं के दौरान छत से लगातार गिट्टी और प्लास्टर गिरते रहते हैं। शुक्रवार को स्थिति उस समय भयावह हो गई, जब पढ़ाई के दौरान विद्यालय भवन का एक बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर गया। गनीमत रही कि इस घटना में कोई छात्र घायल नहीं हुआ, लेकिन अचानक हुए हादसे से बच्चों में दहशत फैल गई और विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। एहतियात के तौर पर विद्यालय प्रबंधन ने तत्काल बच्चों की छुट्टी कर दी।
विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष प्रमोद ठाकुर ने बताया कि बारिश के दिनों में विद्यालय की छत टपकती है और बच्चे हमेशा डर के माहौल में पढ़ाई करने को विवश हैं। उन्होंने कहा कि भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। विद्यालय की एक और गंभीर समस्या शिक्षकों की भारी कमी है। नौवीं और दसवीं तक संचालित इस उच्च विद्यालय में मात्र दो शिक्षक पदस्थापित हैं। इतने कम शिक्षकों के भरोसे सैकड़ों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का उद्देश्य अधूरा रह गया है।
विद्यालय की बदहाल स्थिति को लेकर अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों में भी भारी नाराजगी है। प्रमुख प्रतिनिधि जयराम भारती ने कहा कि इस विद्यालय में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्ग के अधिकांश बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा तो करती है, लेकिन गरीब और ग्रामीण बच्चों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने में विफल रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले भी विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
घटना के बाद भी शिक्षा विभाग के किसी अधिकारी द्वारा विद्यालय का निरीक्षण नहीं किए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भवन की मरम्मत, नए भवन का निर्माण और पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए तथा विद्यालय के नए भवन का निर्माण और शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।























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