मनरेगा कर्मियों की भारी लापरवाही: दर्जनों मजदूरों का फंसा आवास योजना का भुगतान; आर्थिक संकट में लाभुक
न्यूज स्केल लाइव
चतरा (मयूरहंड)। मयूरहंड प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कदगांवाकला पंचायत से विकास योजनाओं में घोर लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ मनरेगा कंप्यूटर ऑपरेटर, कनिष्ठ अभियंता (जूनियर इंजीनियर) एवं पंचायत सचिव की उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का खमियाजा गरीब मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। विभागीय सुस्ती के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी अबुआ आवास योजना में काम करने वाले दर्जनों मजदूरों का साप्ताहिक मजदूरी भुगतान पूरी तरह से लटक गया है।

NMMS से हाजिरी बनी, फिर भी 8 दिन बाद मास्टर रोल हुआ ‘शून्य’
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचायत में संचालित प्रधानमंत्री और अबुआ आवास योजना के तहत दर्जनों जरूरतमंद मजदूरों को रोजगार देने और उनके भुगतान को लेकर नियमानुसार ‘डिमांड’ (मांग) किया गया था। इसके साथ ही, पारदर्शी व्यवस्था के तहत नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) ऐप के माध्यम से प्रतिदिन कार्य स्थल पर मजदूरों की जियो-टैग उपस्थिति (हाजिरी) भी दर्ज की गई थी।
तमाम तकनीकी और वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद, संबंधित कर्मियों की घोर लापरवाही के कारण मजदूरों का किया गया डिमांड मास्टर रोल आठ दिनों के बाद पोर्टल पर स्वतः ‘शून्य’ (Zero) हो गया। मास्टर रोल रिजेक्ट और शून्य होने के कारण तकनीकी रूप से दर्जनों मजदूरों के बैंक खातों में मजदूरी की राशि नहीं भेजी जा सकी, जिससे उनके समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
30 जून की समय-सीमा नजदीक, मुखिया ने दी चेतावनी
इस गंभीर प्रशासनिक चूक पर तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए कदगांवाकला पंचायत के मुखिया अशोक कुमार भुईयां ने बताया कि: “मनरेगा ऑपरेटर, कनिष्ठ अभियंता और पंचायत सचिव की आपसी तालमेल की कमी और कार्य के प्रति लापरवाही के कारण लगातार दो सप्ताह का मास्टर रोल शून्य हो गया है। सरकारी निर्देशानुसार, मनरेगा के तहत प्रधानमंत्री एवं अबुआ आवास योजना के लंबित भुगतानों को पूरा करने की अंतिम तिथि 30 जून तक ही निर्धारित है।”
मुखिया ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उक्त कर्मियों का यही अड़ियल और सुस्त रवैया रहा, तो तय समय-सीमा बीत जाने के बाद मजदूरों का मजदूरी भुगतान पूरी तरह से डूब जाएगा। इसके साथ ही, अपने आशियाने का सपना देख रहे गरीब आवास लाभुकों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, क्योंकि उन्हें अपने पास से या कर्ज लेकर काम कराना होगा।

उच्चाधिकारियों से की जाएगी शिकायत
स्थानीय ग्रामीणों और मजदूरों का कहना है कि एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया और समय पर भुगतान का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं प्रखंड स्तर पर बैठे कर्मी योजनाओं को फ्लॉप करने में तुले हैं। मुखिया अशोक कुमार भुईयां ने इस संबंध में चतरा उप विकास आयुक्त (DDC) और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) से मिलकर दोषी कर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और मजदूरों का न्यायसंगत भुगतान अविलंब सुनिश्चित कराने की मांग करने की बात कही है।






















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