एससी-एसटी थाने पहुंचा हाई-प्रोफाइल मामला, लिखित आवेदन के बाद पुलिस ने शुरू की हाई-लेवल जांच; न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा पीड़ित पक्ष; पुलिस बोली— ‘जुल्मी कोई भी हो, चलेगा कानून का चाबुक’
न्यूज स्केल लाइव
चतरा: चतरा जिले के कोयलांचल और राजनीतिक गलियारों में इन दिनों कथित रूप से तेजी से वायरल हो रहे एक बेहद आपत्तिजनक ऑडियो-वीडियो ने भारी खलबली मचा दी है। इस वायरल डिजिटल सामग्री के सामने आने के बाद जिले के प्रबुद्ध राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस और चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वायरल हो रही इस कथित क्लिप में क्षेत्र के एक कद्दावर जनप्रतिनिधि पर सरेआम अमर्यादित, असंसदीय भाषा का प्रयोग करने तथा लोकतंत्र को शर्मसार करने वाली “सर तन से जुदा” जैसी जानलेवा व अति गंभीर धमकी देने का सनसनीखेज आरोप लगाया जा रहा है। हालांकि, न्यूज स्केल लाइव इस वायरल हो रहे वीडियो की सत्यता और प्रामाणिकता की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है।
अवैध कोयला कारोबार और वर्चस्व की जंग में दी गई खौफनाक धमकी
मामले को लेकर पीड़ित सह शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, चतरा के आर्थिक तंत्र को खोखला करने वाले अवैध कोयला कारोबार (इलीगल कोल माइनिंग) और क्षेत्र में अपना एकछत्र वर्चस्व स्थापित करने को लेकर दो पक्षों के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हुआ था।
इसी विवाद के दौरान कथित तौर पर एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस खौफनाक और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि वायरल वीडियो में कथित रूप से यह भी साफ-साफ सुनाई दे रहा है कि अवैध कार्यों का विरोध करने वाले स्थानीय ग्रामीणों और विरोधियों को अंजाम भुगतने और गंभीर परिणाम झेलने की सीधी चेतावनी दी जा रही है।
थाना प्रभारी पर लगा गंभीर आरोप, मामला दबाने के बाद एससी-एसटी थाना पहुंची पुलिस
इस पूरे मामले में चतरा पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता ने सीधे तौर पर संबंधित स्थानीय थाना प्रभारी पर यह बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है कि रसूखदार जनप्रतिनिधि के दबाव में आकर थाना प्रभारी द्वारा उनकी लिखित शिकायत दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया गया और मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया।
स्थानीय थाने से न्याय न मिलता देख और अपनी सुरक्षा को खतरे में पाकर पीड़ित पक्ष ने सीधे जिला मुख्यालय स्थित अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) विशेष थाने का रुख किया। एससी-एसटी थाने में जनप्रतिनिधि के खिलाफ नामजद लिखित आवेदन देकर अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम सहित अन्य कड़ी धाराओं के तहत अविलंब प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी विधिक दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आवेदन को आधिकारिक रूप से प्राप्त कर इसकी तकनीकी व धरातलीय जांच शुरू कर दी है।
लोकतांत्रिक मूल्यों पर बड़ा प्रहार, न्याय के लिए सोमवार को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा पीड़ित पक्ष
इस हाई-प्रोफाइल घटना के सार्वजनिक रूप से सामने आने के बाद चतरा के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों के बीच यह कड़ा विषय बन गया है कि यदि साइबर सेल और विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की जांच में इस वायरल सामग्री की पुष्टि शत-प्रतिशत सही पाई जाती है, तो कानून-व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिहाज से यह बेहद संगीन और अक्षम्य मामला माना जाएगा।
इधर, स्थानीय पुलिस प्रशासन के ढुलमुल रवैये और जनप्रतिनिधि के राजनीतिक रसूख को देखते हुए पीड़ित पक्ष ने बड़ा ऐलान किया है कि वे इस पूरे मामले को लेकर आगामी सोमवार को माननीय झारखंड उच्च न्यायालय (High Court) में रिट याचिका दायर कर अपनी सुरक्षा और सीबीआई (CBI) या निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की गुहार लगाएंगे।
कानून से ऊपर कोई नहीं, जांच के बाद चलेगा पुलिस का चाबुक: जिला पुलिस
फिलहाल, इस पूरे मामले पर जिले के प्रबुद्ध नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें पुलिस के कॉल डिटेल्स अनुसंधान (CDR) और जिला प्रशासन की अगली दंडात्मक कार्रवाई पर पूरी तरह टिकी हुई हैं।
इस संवेदनशील मामले पर चतरा जिला पुलिस के वरीय अधिकारियों ने अपना कड़ा रुख साफ करते हुए कहा है कि पूरे मामले की वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं पर गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि कानून की नजर में सब बराबर हैं। जुल्मी और कानून तोड़ने वाला व्यक्ति कितना भी रसूखदार या बड़ा जनप्रतिनिधि क्यों न हो, चतरा पुलिस का विधिक चाबुक हर हाल में कड़ाई से चलेगा। पूरी निष्पक्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की बड़ी कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।






















Total Users : 1015062
Total views : 2792989