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बूंद-बूंद पानी को तरस रहा अनुसूचित जाति टोला: जल जीवन मिशन पूरी तरह फेल, भीषण गर्मी के बीच दूर-दूर से गंदा पानी लाने को मजबूर हैं ग्रामीण

On: June 11, 2026 11:07 PM
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पानी के लिए मचा हाहाकार; भू-जल स्तर गिरने से सभी हैंडपंप पड़े ठप, मासूम बच्चों और महिलाओं का सफर दर्दनाक; समाजसेवी ने दी सामूहिक भूख हड़ताल की कड़ी चेतावनी

न्यूज स्केल लाइव

मयूरहंड (चतरा): चतरा जिले के सिमरिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मयूरहंड प्रखंड में आसमान से बरसती आग और रिकॉर्डतोड़ भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण जनता के सामने पानी का एक बहुत बड़ा और जानलेवा संकट खड़ा हो गया है। प्रखंड की मंझगावां पंचायत अंतर्गत अनुसूचित जाति टोला मंझगावां में पेयजल (पीने के पानी) की घोर किल्लत से त्रस्त महादलित व गरीब परिवारों के बीच इन दिनों हाहाकार और त्राहिमाम की स्थिति मची हुई है।

हालत यह है कि सुबह की पहली किरण फूटने के साथ ही इस टोले के पुरुष, लाचार महिलाएं और स्कूल जाने वाले मासूम बच्चे हाथों में खाली बाल्टी, डब्बे और बर्तन लिए चिलचिलाती धूप में मीलों दूर पानी की तलाश में भटकने निकल पड़ते हैं, तब कहीं जाकर उन्हें बड़ी मशक्कत के बाद जैसे-तैसे पीने के लिए थोड़ा पानी नसीब हो पाता है।

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भू-जल स्तर गिरने से फेल हुए सारे चापाकल, दूषित पानी पीने से महामारी का खतरा

मंझगावां के इस गरीब टोले में पेयजल संकट की स्थिति इतनी भयावह और विकट हो चुकी है कि लगातार गिरते भू-जल स्तर (वॉटर लेवल) के कारण गाँव के लगभग सभी हैंडपंप (चापाकल) पूरी तरह हवा उगल रहे हैं या बंद पड़े हैं। सबसे हैरान करने वाली और चिंताजनक बात यह है कि लंबी और पथरीली दूरी तय करने के बाद ग्रामीणों को जो पानी जैसे-तैसे कुओं या ढोढियों से मिलता है, वह मटमैला और पूरी तरह दूषित है।

स्वास्थ्य के लिए बेहद असुरक्षित और जानलेवा होने के बावजूद प्यास बुझाने के लिए इस दूषित पानी को पीना ग्रामीणों की लाचारी बन चुका है। भीषण गर्मी और तपती धूप में पानी के लिए घंटों भटकना अब यहाँ के लोगों की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है, जिसका सीधा और विपरीत असर उनके कृषि कार्यों, खेती-किसानी और दैनिक मजदूरी पर पड़ रहा है। पानी के चक्कर में मजदूरों की दिहाड़ी छूट रही है।

कागजों पर चल रहा ‘जल जीवन मिशन’, सरकार के दावों की खुली पोल: नवल किशोर सिंह

इस गंभीर और मानवीय समस्या को लेकर मयूरहंड के स्थानीय प्रबुद्ध समाजसेवी नवल किशोर सिंह ने अंचल प्रशासन, पीएचईडी (PHED) विभाग और ठेकेदारों के गठजोड़ पर बड़ा गंभीर और सीधा प्रहार किया है। उन्होंने व्यवस्था को आईना दिखाते हुए तीखे लहजे में कहा:

“केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना चतरा के मयूरहंड प्रखंड में ज़मीनी स्तर पर पूरी तरह से फेल, दम तोड़ती और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी साबित हो रही है। एक ओर जहाँ सरकार हर घर नल से जल पहुंचाने और करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने का खोखला दावा करती है, वहीं मयूरहंड की यह मर्मस्पर्शी तस्वीर उन दावों की सरेआम पोल खोल रही है। बार-बार प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और कनीय अभियंताओं से लिखित गुहार लगाने के बाद भी हालात में कोई सुधार नहीं हो रहा है और कुंभकर्णी नींद में सोए अधिकारी पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं।”

लाचार ग्रामीणों ने दिया अल्टीमेटम— ‘पानी नहीं मिला, तो सामूहिक भूख हड़ताल पर बैठेंगे’

समाजसेवी नवल किशोर सिंह ने जिला प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि अगले कुछ दिनों के भीतर मंझगावां अनुसूचित जाति टोले में टैंकरों के माध्यम से पानी की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई या चापाकलों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे ग्रामीणों के साथ लाचार होकर समाहारणालय के समक्ष सामूहिक रूप से विधिक ‘भूख हड़ताल’ और उग्र आंदोलन करने को पूरी तरह बाध्य होंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी चतरा जिला प्रशासन की होगी।

प्रभावित ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में पानी की यह किल्लत और उग्र रूप ले लेगी, जिससे गाँव में कोई बड़ी बीमारी या महामारी फैल सकती है। अब इस ग्राउंड रिपोर्ट के बाद देखना यह होगा कि एयरकंडीशन कमरों में बैठे अधिकारी इस प्यासी महादलित बस्ती को पानी की किल्लत से कब तक निजात दिला पाते हैं।

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