भीषण गर्मी में वन्य जीवों के पानी पर संकट, दिन-रात बिना नंबर के दौड़ रहे ट्रैक्टर; सरकार को लग रहा लाखों के राजस्व का चूना; स्थानीय पुलिस और माइनिंग विभाग की मिलीभगत के उठ रहे सवाल
न्यूज स्केल लाइव रिपोर्टर: तुलसी यादव
गिद्धौर (चतरा): चतरा जिले के गिद्धौर थाना क्षेत्र अंतर्गत बलबल मुहाने नदी से इन दिनों अवैध बालू का उत्खनन और परिवहन चरम पर पहुंच गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त निर्देशों और प्रशासनिक दावों को ठेंगा दिखाते हुए बालू माफिया पूरी नदी को खोखला करने में जुटे हैं। इस पूरे काले खेल पर स्थानीय प्रशासन और संबंधित माइनिंग विभाग द्वारा साधी गई रहस्यमय चुप्पी अब सीधे तौर पर उनके संरक्षण और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
भीषण गर्मी में बेजुबान वन्य जीवों के पानी पर डाका, नदी के अस्तित्व पर संकट
वर्तमान में पड़ रही भीषण और रिकॉर्डतोड़ गर्मी के कारण जंगलों के जलस्रोत पहले ही सूख चुके हैं, जिससे जंगली जानवरों को पानी पीने के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वन्य जीव पानी की तलाश में नदी का रुख करते हैं, लेकिन बलबल मुहाने नदी में दिन-रात अवैध बालू उत्खनन के कारण दर्जनों ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट गूंज रही है।
माफियाओं की इस भारी दखलअंदाजी से वन्य प्राणियों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। लगातार अंधाधुंध बालू के उठाव से जहां एक ओर सदानीरा बलबल नदी के अस्तित्व पर ही खतरा आ गया है, वहीं दूसरी ओर झारखंड सरकार को भी हर दिन लाखों रुपये के राजस्व की भारी हानि पहुंचाई जा रही है।
पड़ोसी जिले हजारीबाग तक 30 किमी निर्बाध सप्लाई, बिना साठगांठ कैसे संभव?
संवाददाता की जमीनी पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बलबल नदी से लूटा गया यह अवैध बालू केवल चतरा ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जिला हजारीबाग के शहरी इलाकों और विभिन्न निर्माण क्षेत्रों में धड़ल्ले से खपाया जा रहा है। गिद्धौर से हजारीबाग शहर की दूरी लगभग 30 किलोमीटर है।
ऐसे में प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा यह यक्ष प्रश्न उठाया जा रहा है कि आखिर बिना स्थानीय पुलिस, अंचल अधिकारियों और परिवहन विभाग की मिलीभगत के, बालू से लदे ये अवैध ट्रैक्टर तीन-तीन थानों की सीमा को पार कर 30 किलोमीटर दूर हजारीबाग तक कैसे पहुंच जाते हैं। स्पष्ट है कि इस पूरे रूट पर अवैध एंट्री और चढ़ावे का एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।
सस्ते श्रम के लिए नाबालिग बच्चों का शोषण, बिना नंबर प्लेट के दौड़ रहे ‘यमदूत’
बालू माफिया अपनी तिजोरी भरने के लिए न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि मानवाधिकारों और कानून की भी धज्जियां उड़ा रहे हैं। ट्रैक्टरों में बालू लोड करने के लिए बेहद कम मजदूरी पर स्थानीय गरीब नाबालिग बच्चों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है, जो बाल श्रम कानून के तहत एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है।
इसके साथ ही, इस अवैध परिवहन में लगे अधिकांश ट्रैक्टरों में जानबूझकर नंबर प्लेट नहीं लगाया गया है। बिना नंबर के सड़कों पर काल बनकर दौड़ रहे ये ट्रैक्टर अक्सर राहगीरों को अपनी चपेट में ले लेते हैं। दुर्घटना होने की स्थिति में बिना नंबर वाले ये वाहन मौके से आसानी से फरार हो जाते हैं और बाद में पर्दे के पीछे से मामले को ‘मैनेज’ (रफा-दफा) कर लिया जाता है।
माफियाओं पर कब चलेगा प्रशासन का डंडा?
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने चतरा उपायुक्त रवि आनंद और जिला खनन पदाधिकारी से मांग की है कि गिद्धौर के बलबल मुहाने नदी में तत्काल विशेष छापेमारी दल भेजकर इस अवैध खनन को रोका जाए। नदी को बचाने, वन्य जीवों की रक्षा करने और नाबालिगों के शोषण पर पूर्ण विराम लगाने के लिए इस धंधे के मुख्य सरगनाओं को चिन्हित कर सलाखों के पीछे भेजना बेहद जरूरी हो गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ग्राउंड रिपोर्ट के बाद कब जागता है।




















Total Users : 1010086
Total views : 2786156