क्षमता से अधिक यात्रियों को बसों में ठूंसकर वसूला जा रहा पूरा किराया; यात्रियों ने उठाई मांग— ‘सीट न मिलने पर लिया जाए केवल तीन-चौथाई भाड़ा’; मानकों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने की मांग
न्यूज स्केल लाइव (सतीश पांडे)
प्रतापपुर (चतरा): चतरा जिले के प्रतापपुर प्रखंड समेत पूरे जिले में पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के मद्देनजर हाल ही में बसों एवं अन्य यात्री वाहनों के किराए में भारी वृद्धि की गई है। परिवहन व्यवसाय से जुड़े संचालकों की अपनी आर्थिक चुनौतियां और तर्क हो सकते हैं, लेकिन इस बेतहाशा किराया वृद्धि से आम जनता और गरीब यात्रियों की जेब पर बढ़ता आर्थिक बोझ भी एक बड़ी सच्चाई है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और यात्रियों का कहना है कि यदि किराया बढ़ाना समय की मांग है, तो इसके साथ ही यात्रियों को बेहतर सुविधा, सुरक्षा और उनके मौलिक अधिकारों की गारंटी भी मिलनी चाहिए।
बिना रजिस्ट्रेशन नंबर और रूट के बांटे जा रहे ‘फर्जी’ टिकट, सुरक्षा भगवान भरोसे
किराया वृद्धि के बीच सबसे बड़ा सवाल टिकट व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रामाणिकता को लेकर खड़ा हो गया है। वर्तमान में प्रतापपुर रूट पर चलने वाली अधिकांश बसों में यात्रियों को जो टिकट दिए जाते हैं, वे पूरी तरह मानकों के विपरीत हैं: आवश्यक जानकारियां गायब: इन टिकटों पर न तो बस का नाम दर्ज होता है, न ही वाहन का सरकारी रजिस्ट्रेशन नंबर। यहाँ तक कि यात्रा मार्ग (रूट) अथवा अन्य आवश्यक जानकारियां भी अंकित नहीं रहती हैं। केवल ‘जनता सेवा’ का छलावा: कई टिकटों पर केवल ‘यात्री सेवा’ या ‘जनता सेवा’ जैसे सामान्य शब्द लिखकर यात्रियों को थमा दिए जाते हैं।
यात्रियों का आरोप है कि ऐसी स्थिति में यदि मार्ग में कोई भीषण दुर्घटना हो जाए, शिकायत करनी हो या कोई अन्य विवाद खड़ा हो जाए, तो पीड़ित यात्री या उसके परिजनों के पास संबंधित वाहन की पहचान का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं बचता।
टिकटों के लिए कड़े नियम और जुर्माने का प्रावधान करने की मांग
यात्रियों की सुरक्षा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए प्रतापपुर की जनता ने परिवहन विभाग से मांग की है कि प्रत्येक टिकट पर बस का नाम, वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर, यात्रा मार्ग, चढ़ने और उतरने का स्थान, यात्रा की तिथि व समय तथा निर्धारित किराया स्पष्ट रूप से कंप्यूटर या पेन से अंकित होना अनिवार्य किया जाए। साथ ही, बिना निर्धारित मानकों वाले और बोगस टिकट जारी करने वाले बस संचालकों एवं कंडक्टरों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई और भारी जुर्माने का प्रावधान भी सुनिश्चित किया जाए।
सीट फुल होने के बाद भी ठूंस रहे यात्री, पूरा किराया वसूलना अधिकारों का हनन
क्षेत्र में एक अन्य गंभीर समस्या क्षमता से अधिक यात्रियों को भेड़-बकरियों की तरह बसों में भरकर ले जाने की है। अक्सर देखा जाता है कि बस की सभी सीटें भर जाने के बाद भी बड़ी संख्या में यात्रियों को खड़े-खड़े लंबी दूरी की यात्रा करने के लिए मजबूर किया जाता है, जबकि उनसे सीटों पर बैठे यात्रियों के बराबर ही पूरा किराया वसूला जाता है।
यह न केवल यात्रियों के उपभोक्ता अधिकारों का खुला हनन है, बल्कि किसी भी संभावित दुर्घटना की स्थिति में उनकी जान के लिए भी एक बहुत बड़ा खतरा बन सकता है।
जनता का तार्किक सुझाव: सीट नहीं, तो पूरा किराया भी नहीं
परिवहन विभाग की सुस्ती को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने इस दिशा में स्पष्ट नियम बनाने की मांग की है:
सीट की उपलब्धता अनिवार्य: जिन यात्रियों से परिवहन नियमों के तहत पूरा किराया लिया जा रहा है, उन्हें बैठने के लिए आरामदायक सीट उपलब्ध कराई जाए।
केवल तीन-चौथाई भाड़ा लगे: यदि किसी अपरिहार्य कारणवश या मजबूरी में यात्री को खड़े होकर ही यात्रा करनी पड़ती है, तो उससे पूर्ण किराया न लेकर अधिकतम तीन-चौथाई (75%) किराया ही लिया जाना चाहिए।
वाहन मालिकों पर हो कार्रवाई: निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को ढोने वाले और कानून का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों एवं संचालकों पर जिला प्रशासन सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे।
राजस्व के साथ जवाबदेही भी तय करे परिवहन विभाग
आज आवश्यकता इस बात की है कि किराया वृद्धि को केवल बस मालिकों का राजस्व बढ़ाने का माध्यम न माना जाए, बल्कि इसे यात्री सुविधाओं और सुरक्षा में बड़े सुधार के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। यात्री केवल किराया देने वाले ग्राहक नहीं हैं, बल्कि वे पूरी परिवहन व्यवस्था की असली रीढ़ हैं। इसलिए उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक और पारदर्शी यात्रा उपलब्ध कराना झारखंड सरकार, जिला परिवहन विभाग और वाहन संचालकों की संयुक्त जिम्मेदारी है। पूरा किराया लेने वाली इस व्यवस्था को अब यात्रियों के लिए पूरी सुविधा, सुरक्षित यात्रा और जवाबदेही की भी गारंटी देनी होगी।





















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