प्रखंड प्रमुख और उप प्रमुख ने दीप प्रज्वलित कर किया शुभारंभ; रासायनिक खादों के बहिष्कार और प्राकृतिक खेती का आह्वान, काफी संख्या में शामिल हुईं महिला किसान दीदियां
इटखोरी (चतरा) | न्यूज स्केल लाइव
चतरा जिले के इटखोरी प्रखंड क्षेत्र के अन्नदाताओं को आधुनिक कृषि तकनीकों से लैस करने, कम पानी में बंपर पैदावार सुनिश्चित करने और परंपरागत खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल की गई है। इटखोरी प्रखंड मुख्यालय स्थित सभागार में शुक्रवार को एक दिवसीय प्रखंड स्तरीय खरीफ कार्यशाला सह कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।
इस अति-महत्वपूर्ण कार्यशाला की आधिकारिक अध्यक्षता प्रखंड प्रमुख श्रीमती प्रिया कुमारी ने की। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ प्रमुख प्रिया कुमारी, उप प्रमुख संजय कुमार एवं जिला मुख्यालय द्वारा प्रतिनियुक्त नोडल पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
पशुपालन से लेकर मत्स्य पालन तक की योजनाओं का खुला पिटारा
इस वृहद कार्यशाला में इटखोरी प्रखंड के विभिन्न गांवों से पहुंचे सैकड़ों प्रगतिशील किसानों को सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत तकनीकी जानकारी दी गई। कार्यशाला में मुख्य रूप से:
कृषि एवं आत्मा (ATMA): खरीफ फसल के दौरान मिलने वाले अनुदानित बीज, आधुनिक कृषि यंत्रों के आधुनिकीकरण और सब्सिडी योजनाओं की जानकारी दी गई।
गव्य, पशुपालन एवं मत्स्य पालन: दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने, उन्नत नस्ल के पशुधन का रख-रखाव, गाय-शेड निर्माण और तालाबों में वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन कर आय दोगुनी करने के गुर सिखाए गए।
केसीसी (KCC) की उपयोगिता: किसानों को बिना बिचौलियों के सीधे बैंकों से जुड़कर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का लाभ उठाने और उसकी सही उपयोगिता के बारे में विस्तार से जागरूक किया गया।
रासायनिक खाद का करें पूर्ण बहिष्कार, वार्मिंग कंपोस्ट और प्राकृतिक खेती पर बल
कार्यशाला के दौरान कृषि वैज्ञानिकों और पदाधिकारियों ने कृषि भूमि की घटती उर्वरा शक्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने किसानों से अपील की कि वे अपनी मिट्टी और स्वास्थ्य को बचाने के लिए जहरीली रासायनिक खादों व कीटनाशकों का पूरी तरह बहिष्कार करें। इसके स्थान पर स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली प्राकृतिक खाद, गोबर खाद और केंचुआ खाद (वार्मिंग कंपोस्ट) के अत्यधिक उपयोग पर बल दिया गया, ताकि जैविक खेती के जरिए फसलों की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा सके।
“इस वर्ष कम बारिश के आसार, मोटे अनाज और वैज्ञानिक पद्धति को अपनाएं”
प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने मौसम के बदलते मिजाज और 42 डिग्री के तपते पारे का हवाला देते हुए किसानों को एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी अलर्ट दिया। उन्होंने बताया:
“वैज्ञानिक इनपुट के अनुसार इस वर्ष मानसून के दौरान कम पानी/कम बारिश होने के आसार बन रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में कम पानी में भी धान और अन्य फसलों की पैदावार को कैसे बढ़ाया जाए, इसके लिए विशेष रणनीति अपनानी होगी। किसानों को कम अवधि और कम पानी सोखने वाली उन्नत नस्ल के बीजों का ही चयन करना चाहिए।”
कृषि वैज्ञानिकों ने मोटा अनाज (श्री अन्न जैसे मड़ुआ, ज्वार, बाजरा) की पैदावार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया, क्योंकि ये फसलें कम पानी और विपरीत मौसम में भी बंपर मुनाफा देती हैं। इसके साथ ही समय-समय पर अनिवार्य रूप से अपने खेतों की मिट्टी की जांच (Soil Testing) कराने और सॉइल हेल्थ कार्ड के अनुसार ही पोषक तत्वों का इस्तेमाल करने की वैज्ञानिक विधि बारीकी से समझाई गई।
कार्यशाला में प्रशासनिक टीम और कृषि वैज्ञानिक रहे मौजूद:
इटखोरी की इस खरीफ कार्यशाला में मुख्य रूप से: प्रिया कुमारी (प्रखंड प्रमुख) संजय कुमार (उप प्रमुख) विष्णु कांत पांडे (नोडल पदाधिकारी) बिलाल अंसारी (प्रखंड कृषि पदाधिकारी) गणेश दांगी (प्रखंड तकनीकी प्रबंधक – BTM) केवीके (KVK) के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक सहित प्रखंड के तमाम किसान मित्र, प्रगतिशील कृषक और काफी बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र से आईं जागरूक किसान महिला दीदियां मुख्य रूप से उपस्थित थीं।




















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