सड़कों पर नमाज पढ़ने वालों को सीएम योगी की सख्त नसीहत, असम में अजान पर रोक की सुगबुगाहट; बंगाल के इमाम की ‘गौ माता’ को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग और दक्षिण से पूर्व तक ‘चुनावी गारंटियों’ का पूरा सच
विशेष राजनीतिक डेस्क | न्यूज़ स्केल लाइव
‘न्यूज़ स्केल लाइव’ के विशेष कार्यक्रम “प्रसंग वश” में आपका स्वागत है। देश की समसामयिक राजनीति, राज्यों के आंतरिक प्रशासनिक फैसलों और सांप्रदायिक सौहार्द व चुनावी रणनीतियों के बीच चल रही शह-मात के खेल पर आज अपनी बेबाक और बारीक नजर रखने के लिए हमारे साथ मौजूद हैं देश के वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा। आज ‘प्रसंग वश’ में हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े तेवर, असम से उठी अजान पर रोक की मांग, पश्चिम बंगाल के इमाम का चौंकाने वाला बयान और नवनिर्वाचित सरकारों द्वारा अभी से साल 2031 की सत्ता को दोहराने के लिए बिछाई जा रही लोक-लुभावन गारंटियों की बिसात का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।
योगी आदित्यनाथ का कड़ा संदेश: “दंगे नहीं होने देंगे, प्रेम से मान जाओ वरना…”
उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक बार फिर बेहद आक्रामक और सख्त रुख सामने आया है। सड़कों पर नमाज पढ़ने और यातायात व्यवस्था को बाधित करने वालों को सीधी नसीहत देते हुए सीएम योगी ने दोटूक शब्दों में कहा है कि सभी लोग प्रेम और नियम-कानून से मान जाएं, अन्यथा प्रशासन को व्यवस्था बनाए रखने के लिए दूसरा रास्ता (सख्ती का रास्ता) अपनाना पड़ेगा।
वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा का विश्लेषण: “सीएम योगी का यह बयान उत्तर प्रदेश में उनके ‘जीरो टॉलरेंस’ मॉडल को री-इन्फोर्स करता है। योगी जी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए सार्वजनिक मंच से कहा कि जब वे पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे, तब सूबे में हर दूसरे दिन दंगे हुआ करते थे। लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है और उत्तर प्रदेश दंगा मुक्त हो चुका है। धार्मिक स्वतंत्रता अपनी जगह है, लेकिन आम नागरिकों को असुविधा पहुंचाकर या सड़कों को अवरुद्ध कर कोई भी धार्मिक गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। योगी जी का साफ संदेश है कि यूपी में कानून का राज ही सर्वोपरि रहेगा।”
असम में ‘अजान’ पर रोक की मांग; विधानसभा में गूंजेगी आवाज
उत्तर प्रदेश के बाद अब पूर्वोत्तर राज्य असम से भी धार्मिक लाउडस्पीकरों और अजान को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। असम में अब लाउडस्पीकर के माध्यम से होने वाली ‘अजान’ पर पूरी तरह रोक लगाने की आवाज मुखर होने लगी है। स्थानीय विधायकों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे इस जनभावना और ध्वनि प्रदूषण के गंभीर मुद्दे को असम विधानसभा के आगामी सत्र के पटल पर पूरी मजबूती से उठा सकते हैं। इस सुगबुगाहट के बाद असम की सियासत में वैचारिक टकराव बढ़ने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।
बंगाल में नाखोदा के इमाम का बड़ा बयान: “गौ माता को घोषित करो राष्ट्रीय पशु”
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक सम्मान को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और ऐतिहासिक बयान सामने आया है। कोलकाता की प्रसिद्ध नाखोदा मस्जिद के इमाम ने केंद्र सरकार और समाज के सामने एक बड़ी मांग रखते हुए कहा है कि बहुसंख्यक हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं और देश की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए ‘गाय’ (गौ माता) को अविलंब भारत का राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए। इमाम के इस प्रगतिशील बयान की देशभर के सामाजिक हलकों में जमकर सराहना और चर्चा हो रही है।
सरकार बने एक महीना भी नहीं हुआ, और बंगाल-तमिलनाडु में शुरू हुई 2031 की तैयारी!
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में नई सरकारों के गठन को अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन दोनों ही राज्यों के राजनीतिक रणनीतिकारों ने अभी से आगामी वर्ष 2031 के विधानसभा चुनावों में दोबारा सत्ता हासिल करने (सरकार दोहराने) के लिए अपनी चौतरफा बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसके लिए दोनों राज्यों में आम जनता, विशेषकर महिलाओं और युवाओं को साधने के लिए लोक-लुभावन ऐतिहासिक घोषणाएं और चुनावी गारंटियां धरातल पर उतारी जा रही हैं:
1. पश्चिम बंगाल (ममता सरकार का बड़ा दांव): सत्ता में आते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी चुनावी गारंटियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है।
फ्री बस यात्रा: राज्य की आधी आबादी को बड़ा तोहफा देते हुए महिलाओं के लिए सरकारी बसों में यात्रा पूरी तरह से निःशुल्क (फ्री) कर दी गई है।
₹3000 मासिक सहायता: महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए हर महीने मिलने वाली वित्तीय सहायता राशि को बढ़ाकर सीधे 3,000 रुपये प्रति माह करने की मंजूरी दे दी गई है, जिससे सीधे तौर पर करोड़ों गृहणियां लाभान्वित होंगी।
2. तमिलनाडु (सादगी के ‘विजय’ पथ पर मुख्यमंत्री): तमिलनाडु की नवगठित सरकार में भी 2031 की सत्ता को रिपीट करने के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य के युवाओं और छात्रों के लिए मुफ्त भोजन व अत्याधुनिक हॉस्टल (Free Food & Hostels) की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है।
सीएम विजय की सादगी: इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री विजय की सादगी को लेकर हो रही है। मुख्यमंत्री विजय ने एक नई और अनुकरणीय नजीर पेश करते हुए घोषणा की है कि वे सरकारी खजाने पर बोझ कम करने और पारदर्शिता का संदेश देने के लिए अपने आधिकारिक सचिवालय (Chief Minister’s Office) में सरकारी कैंटीन या शाही भोजन के बजाय प्रतिदिन अपने घर से टिफिन लाकर सादा भोजन करेंगे।




















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