प्रदूषण और पलायन की दोहरी मार झेल रहे शिवपुर, टेकठा और हाण्डू के ग्रामीण; स्थानीय युवाओं की हकमारी पर फूटा आक्रोश, मांग पूरी न होने पर शिवपुर रेलवे साइडिंग ठप करने की दी चेतावनी
शशि पाठक | न्यूज़ स्केल लाइव
चतरा जिले के टंडवा औद्योगिक और कोयलांचल क्षेत्र में संचालित सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) की महत्वाकांक्षी आम्रपाली कोल परियोजना में कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनियों की मनमानी और तानाशाही अब पूरी तरह चरम पर पहुंच चुकी है। परियोजना में कोयला खनन और ढुलाई का जिम्मा संभाल रही बड़ी आउटसोर्सिंग कंपनियों— NCC (नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी) और वेरिएंट द्वारा स्थानीय विस्थापित एवं प्रभावित क्षेत्र के शिक्षित व योग्य कामगारों को रोजगार से पूरी तरह वंचित रखा जा रहा है। इसके विपरीत यहाँ धड़ल्ले से बड़ी संख्या में बाहरी लोगों को रोजी-रोटी से जोड़ा जा रहा है, जिसके कारण अब पूरे कोयलांचल क्षेत्र में एक बड़े और उग्र जनांदोलन की चिंगारी सुलग उठी है।
उपायुक्त रवि आनंद को सौंपा ज्ञापन; महापंचायत के निर्णयों का किया उल्लेख
स्थानीय युवाओं की हकमारी और कंपनियों की मनमानी के खिलाफ विस्थापित व प्रभावित ग्रामीणों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को चतरा समाहरणालय पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त (DC) रवि आनंद से मुलाकात कर उन्हें अपनी मांगों से संबंधित एक विस्तृत लिखित ज्ञापन सौंपा।
इस सौंपे गए ज्ञापन में पिछले दिनों रविवार को शिवपुर, टेकठा, और हाण्डू समेत अन्य विभिन्न गांवों के प्रबुद्ध नागरिकों व बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों की हुई महाबैठक (महापंचायत) में सर्वसम्मति से लिये गये कड़े और निर्णायक फैसलों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
प्रदूषण की मार स्थानीय झेलें और मलाई खाएं बाहरी: ग्रामीणों का दर्द
उपायुक्त के समक्ष अपनी पीड़ा रखते हुए विस्थापित नेताओं और ग्रामीणों ने कहा कि आम्रपाली कोल परियोजना के भारी कोयला उत्खनन और ट्रांसपोर्टिंग (ढुलाई) के कारण पूरे इलाके में भयानक कोयला डस्ट और वायु प्रदूषण फैल रहा है। इस भारी प्रदूषण से स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य, उनका सामान्य जीवन और खेती-बाड़ी जैसी जीविका पर बेहद गंभीर और जानलेवा प्रभाव पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ जहाँ प्रदूषण का जहर स्थानीय ग्रामीण और उनके मासूम बच्चे झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा स्थानीय युवाओं को नौकरी और रोज़ी-रोजगार से जानबूझकर वंचित रखा जा रहा है। रोजगार न मिलने के कारण कोयलांचल के मूलवासी युवाओं का तेजी से दूसरे राज्यों में पलायन हो रहा है, जिससे प्रभावित परिवारों में घोर आक्रोश पनप रहा है।
शिवपुर रेलवे साइडिंग तक कोल ट्रांसपोर्टिंग ठप करने की दी बड़ी चेतावनी
विस्थापितों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि यदि इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर जिला प्रशासन द्वारा शीघ्र हस्तक्षेप कर कोई ठोस पहल नहीं की गई, तो प्रभावित ग्रामीण चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने अल्टीमेटम दिया है कि अपनी जायज मांगों को लेकर ग्रामीण बहुत जल्द शिवपुर रेलवे साइडिंग तक होने वाले संपूर्ण कोल ट्रांसपोर्टिंग (कोयला ढुलाई) कार्य को पूरी तरह से ठप कर अनिश्चितकालीन चक्का जाम कर देंगे, जिसकी पूरी जवाबदेही प्रबंधन की होगी।
पैसे और पैरवी का खेल! सक्रिय है बाहरी कामगारों को घुसाने वाला ‘सिंडिकेट’
सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, आउटसोर्सिंग कंपनी NCC (नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी) में स्थानीय विस्थापितों की आँखों में धूल झोंककर रोजगार दिलाने के नाम पर एक बहुत बड़ा और रसूखदार ‘सिंडिकेट’ (दलाल तंत्र) सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
यह सिंडिकेट सफेदपोश रसूखदारों की ऊंची पैरवी, सेटिंग और मोटी रकम (पैसों) की बदौलत नियम-कानूनों को ताक पर रखकर चतरा से बाहर के सैकड़ों बाहरी कामगारों को कंपनी में नियोजित करवा चुका है, जबकि जमीन देने वाले मूलवासी विस्थापित दर-दर भटकने को मजबूर हैं। बहरहाल, ज्ञापन सौंपने के बाद अब तमाम विस्थापित और प्रभावित ग्रामीण जिला प्रशासन और उपायुक्त रवि आनंद के कड़े रुख और उनकी अगली त्वरित कार्रवाई का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले मुख्य जनप्रतिनिधि व ग्रामीण: इस महत्वपूर्ण मांग-पत्र में मुख्य रूप से जिला परिषद सदस्या देवन्ती देवी, स्थानीय मुखिया सुबेश राम, उमेश गंझु, लखन गंझु, लोकनाथ गंझु, प्रेम गंझु, साहेब गंझु समेत क्षेत्र के अन्य दर्जनों गणमान्य ग्रामीणों और विस्थापितों के सामूहिक हस्ताक्षर मौजूद हैं।
























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