उपायुक्त की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति की बड़ी बैठक; ड्राइवरों का होगा रैंडम टेस्ट, नो-एंट्री में ब्रेथ एनालाइजर से होगी शराब की जांच, गड्ढों को भरने का निर्देश
📍 चतरा | News Scale Live
चतरा जिले में लगातार हो रहे जानलेवा सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने अब बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में शनिवार को जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त रवि आनंद की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले की सड़कों को सुरक्षित बनाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों पर नकेल कसने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए। बैठक में एसपी अनिमेष नैथानी भी विशेष रूप से उपस्थित थे।
4 महीने में 65 हादसे: प्रशासन ने जताई गहरी चिंता
बैठक के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी सिमरिया-सह-जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) माहेश्वरी प्रसाद ने चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि:
जनवरी से अप्रैल 2026 तक (मात्र 4 महीनों में) जिले में कुल 65 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं।
इन हादसों की मुख्य वजहों में ड्रिंक एंड ड्राइव (शराब पीकर गाड़ी चलाना), ओवरस्पीडिंग (तेज रफ्तार), घाटी क्षेत्रों में ब्रेक फेल होना और एक ही चालक द्वारा बिना आराम किए लगातार लंबे समय तक वाहन चलाना शामिल हैं।
सड़क हादसों को रोकने के लिए DC के 6 कड़े निर्देश:
1. रफ्तार पर कैपिंग (अधिकतम 40 KM/H): उपायुक्त ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जिले में किसी भी लोडेड भारी वाहन (हाइवा/ट्रक) की गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर कोई चालक इस नियम को तोड़ता है, तो वाहन मालिक और चालक दोनों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
2. चालकों का होगा रैंडम ड्राइविंग टेस्ट: डीटीओ को निर्देश दिया गया है कि वे ट्रांसपोर्ट कंपनियों में जाकर वहां कार्यरत भारी वाहन चालकों का औचक (रैंडम) ड्राइविंग टेस्ट लें। जांच में अयोग्य या नौसिखिया पाए जाने वाले ड्राइवरों को तुरंत हटाया जाएगा।
3. नो-एंट्री में ब्रेथ एनालाइजर से जांच: शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ अब नियमित अभियान चलेगा। विशेषकर नो-एंट्री वाले क्षेत्रों में घुसने वाले व्यावसायिक वाहनों के चालकों की ब्रेथ एनालाइजर मशीन से अनिवार्य रूप से जांच की जाएगी।
4. दुर्घटना होने पर होगी मेडिकल जांच: लंबे समय तक बिना सोए गाड़ी चलाने की आदत पर चिंता जताते हुए डीसी ने कहा कि किसी भी हादसे की स्थिति में सबसे पहले चालक की चिकित्सीय (मेडिकल) जांच कराई जाएगी, ताकि थकान या नशे की स्थिति स्पष्ट हो सके।
5. गड्ढों की मरम्मत और CCTV: उपायुक्त ने जिले के तमाम संवेदनशील दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) को चिन्हित कर वहां सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया। साथ ही, जोड़ी-हंटरगंज मार्ग और टंडवा सहित विभिन्न क्षतिग्रस्त सड़कों के गड्ढों को अविलंब दुरुस्त करने का निर्देश दिया।
6. टू-व्हीलर चालकों के लिए विशेष चेकिंग: दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी सख्ती बढ़ाई जाएगी। हेलमेट, प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC), इंश्योरेंस और अन्य वैध कागजात की सघन जांच के लिए जल्द ही विशेष अभियान शुरू किया जाएगा।
ट्रांसपोर्टरों को नसीहत: डीसी ने बैठक में मौजूद ट्रांसपोर्टर प्रतिनिधियों से कहा कि वे अपने मुनाफे के लिए चालकों की जिंदगी और सड़क सुरक्षा से खिलवाड़ न करें। उन्होंने वाहन चालकों के लिए नियमित रूप से ‘सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला’ आयोजित करने और उनसे लगातार संवाद बनाए रखने की हिदायत दी। इस महत्वपूर्ण बैठक में पुलिस अधीक्षक अनिमेष नैथानी, अपर समाहर्ता अरविंद कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी चतरा जहूर आलम, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) चतरा सहित विभिन्न विभागों के आला अधिकारी और ट्रांसपोर्टर प्रतिनिधि मौजूद थे।





















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