लोहरदगा: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शनिवार को लोहरदगा स्थित शीला अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर के परिसर में एक भव्य ‘प्रमुख नागरिक गोष्ठी’ का आयोजन किया गया। युगाब्द 5128 और विक्रम संवत 2083 के विशेष संदर्भों के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध वर्ग ने शिरकत की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार टोली सदस्य श्रीमान मुकुल कानिटकर जी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि संघ अपने स्थापना के 100वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने एक विकसित, सजग और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष केवल उत्सव मनाने का समय नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग के साथ संवाद कर राष्ट्र निर्माण के संकल्पों को धरातल पर उतारने का समय है।
परिवार वह प्राथमिक पाठशाला है जहाँ से व्यक्ति में नागरिकता, नैतिकता और धर्म के संस्कार अंकुरित होते हैं। यदि परिवार वैचारिक रूप से जागृत है, तो समाज स्वतः ही सशक्त बनेगा।
कुटुंब प्रबोधन का लक्ष्य परिवारों को केवल अपने तक सीमित न रखकर उन्हें समाज के अन्य वर्गों से जोड़ना है। जब परिवार आपस में मिलते हैं, तो जाति और ऊंच-बिच की दूरियां समाप्त होती हैं।
प्रबोधन के माध्यम से परिवारों को स्वदेशी जीवनशैली अपनाने और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया जाता है, जो एक ‘समर्थ भारत’ के लिए अनिवार्य है।
इस अभियान के अंतर्गत परिवारों को सप्ताह में कम से कम एक बार साथ बैठकर भोजन करने, अपनी परंपराओं पर चर्चा करने और महापुरुषों की गाथाएं सुनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
हम अक्सर समानता की बात करते हैं, लेकिन क्या हम एक-दूसरे का सम्मान करना जानते हैं? सामाजिक समरसता का अर्थ यह नहीं है कि हम केवल मंचों पर एक साथ खड़े हों, बल्कि यह है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी वही सम्मान मिले जो शीर्ष पर बैठे व्यक्ति को मिलता है। जब ‘स्व’ का विस्तार होता है, तभी समाज ‘समरस’ होता है। आज लोहरदगा की धरती से उठी यह गूँज एक नए भारत की दिशा तय करेगी।”
”राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में जब हम ‘विकसित भारत’ का सपना देख रहे हैं, तब हमें यह समझना होगा कि कोई भी देश केवल सरकार या संविधान से नहीं, बल्कि अपने नागरिकों के ‘संयम’ से महान बनता है। जब एक नागरिक अपने निजी स्वार्थ का त्याग कर राष्ट्रहित में स्वयं को संयमित करता है, तो वह राष्ट्र अपराजेय बन जाता है। आज लोहरदगा में आयोजित नागरिक गोष्ठी का मूल सार भी यही है—स्वयं को अनुशासित कर समाज को संगठित करना।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला संघ चालक श्री श्याम सुन्दर उराँव ने की। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए समाज के प्रमुख नागरिकों का आभार व्यक्त किया। आयोजन के दौरान ‘समर्थ भारत’ और ‘संगठित हिन्दू’ के विचार को केंद्र में रखकर चर्चा की गई।
आयोजकों के आग्रह पर अधिकांश नागरिक समय से पूर्व ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए थे। कार्यक्रम का समापन शाम 06:30 बजे हुआ, जिसमें राष्ट्र निर्माण के कार्यों में संघ के साथ मिलकर योगदान देने का आह्वान किया गया।
इस मौके पर पूर्ब सांसद सुदर्सन भगत, बिनोद राय, बिशुनपुर पूर्ब बिधायक भिखारी भगत, त्रिबेनी दास,मनोज दास, सचितानंद अग्रवाल, शशिधर अग्रवाल, अजय अग्रवाल, रितेश साहू, मुरली अग्रवाल आचार्य प्रमेन्द्र, बिपिन कुमार दास, बहन जया एवं जिले के सैकड़ों नागरिक उपस्थित थे






















Total Users : 931789
Total views : 2681305