लोहरदगा के निजी स्कूलों की ‘फीस लूट’ के खिलाफ फूटा गुस्सा; जिप उपाध्यक्ष ने उपायुक्त से की कार्रवाई की मांग
लोहरदगा: जिला परिषद उपाध्यक्ष विनोद उरांव ने निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों के आर्थिक शोषण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने उपायुक्त (DC) को पत्र लिखकर स्कूलों द्वारा लिए जा रहे डेवलपमेंट शुल्क, मेंटेनेंस शुल्क और एनुअल फीस के नाम पर वसूली जाने वाली मोटी रकम पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
पत्र में उठाए गए 3 सबसे गंभीर मुद्दे:
RTE नियमों की अनदेखी: जिप उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकारी गाइडलाइन के अनुसार स्कूलों को 25% गरीब बच्चों का नामांकन लेना है, लेकिन निजी विद्यालय इस नियम को धता बताकर मात्र खानापूर्ति कर रहे हैं।
किताब-कॉपी में कमीशन का खेल: शिकायत में कहा गया है कि स्कूल परिसर में किताबें MRP पर बेची जा रही हैं, जबकि वही किताबें खुले बाजार में 50% से 70% तक कम कीमत पर उपलब्ध हैं। यह सीधे तौर पर अभिभावकों की जेब पर डाका है।
रांची की तर्ज पर सख्त निर्देश की मांग: पत्र में रांची उपायुक्त द्वारा निजी स्कूलों पर की गई सख्त कार्रवाई का हवाला देते हुए लोहरदगा में भी वैसा ही कड़ा कदम उठाने का आग्रह किया गया है। साथ ही उन्होंने उपायुक्त से आग्रह किया की
”गरीब परिवार के छात्र-छात्राएं निजी स्कूलों की महंगी फीस के कारण शिक्षा से दूर हो रहे हैं। स्कूलों को विकास के नाम पर वसूली बंद करनी होगी, अन्यथा उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए।”
उपाध्यक्ष के इस पत्र के बाद अब जिले के हजारों अभिभावकों की नजरें उपायुक्त के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर प्रशासन इस पर सख्त रुख अपनाता है, तो लोहरदगा के शिक्षा जगत में यह एक बड़ा सुधार साबित होगा।























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