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गुमला -श्री नारायणी श्याम मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस पर कथा स्थल भक्तिरस से सराबोर हो उठा। व्यासपीठ से कथावाचक श्री आचार्य करुणा शंकर जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की अद्भुत बाल लीलाओं, माखन चोरी, पूतना उद्धार, शकटासुर वध, त्रिणावर्त वध तथा ब्रजवासियों के प्रति प्रभु की करुणा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा में बताया गया कि बालकृष्ण की प्रत्येक लीला केवल मनोरंजन नहीं, अपितु जीव को अहंकार त्याग कर प्रभु शरणागति का संदेश देती है। यशोदा मैया के वात्सल्य, नंद बाबा की ममता तथा ब्रज गोप-गोपियों के निष्काम प्रेम ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
इसके पश्चात गोवर्धन पूजन की कथा का सुंदर वर्णन हुआ। कथावाचक ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को चूर करने हेतु ब्रजवासियों को इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा का उपदेश दिया। श्रीकृष्ण ने स्वयं गोवर्धन रूप धारण कर ब्रजवासियों की श्रद्धा स्वीकार की।
इंद्र के प्रकोप से ब्रज को बचाने हेतु भगवान ने कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर सात दिनों तक समस्त ब्रजवासियों को शरण प्रदान की। इस लीला के माध्यम से प्रभु ने यह संदेश दिया कि जो भी उनकी शरण में आता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं।
कथा के दौरान भजनों एवं संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने “गोवर्धन धारी की जय” के जयकारों से पंडाल गुंजायमान कर दिया। अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ पंचम दिवस की कथा का समापन हुआ।



















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