

लक्ष्य प्राप्ति में सुरक्षा और उत्पादन हैं एक दूसरे के पूरक। इससे कामगारों का मनोबल होता है ऊंचा : जीएम, अमरेश कुमार सिंह
शशि पाठक
टंडवा (चतरा) मंगलवार को आम्रपाली-चंद्रगुप्त परियोजना के महाप्रबंधक कार्यालय परिसर में 68 वां वार्षिक खान सुरक्षा सप्ताह कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। जहां अतिथियों व गणमान्य लोगों द्वारा विधिवत तौर पर झंडोत्तोलन व दीप प्रज्ज्वलित कर मौजूद लोगों को सुरक्षा मानकों के अक्षरशः अनुपालन की शपथ दिलाई। वहीं हेसातु विद्यालय की बालिकाओं ने आकर्षक नृत्य तथा आतिथ्य स्वागत गान से मौजूद लोगों का मन मोह लिया। जीएम अमरेश सिंह ने अपने संबोधन कहा कि सुरक्षित खदान से हीं उत्पादन के बड़े लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। कहा, आम्रपाली परियोजना वर्ष 2014 के शुरुआती उत्पादन 2.5 मिलियन टन कोल उत्पादन से अबतक इसी मूलमंत्रों को अपनाकर पिछले वर्ष 24.85 मिलियन टन सुरक्षित कोल उत्पादन कर नंबर वन पर काबिज रहा। शून्य क्षति का सिलसिला यहां बरकरार रहा है जिससे कामगारों में आत्मविश्वास ऊंचा रहता है। उन्होंने ईश्वर का शुक्रिया अदा करते हुवे कहा कि यहां काले हीरे में कभी भी लाल धब्बा नहीं लगा है। धरती का सीना चीरकर उत्पादित कोयले की आपूर्ति विभिन्न बिजली संयंत्रों में करके औद्योगिक गति को बल तथा विकसित भारत के संकल्पों को साकार करने में भू-दाताओं और कुशल कर्मियों की बड़ी हीं महत्वपूर्ण भूमिका है। माइंस मैनेजर एसके सिन्हा ने कहा कि सत्र 2026-27 में 28 मिलियन टन कोल उत्पादन के लक्ष्यों को हासिल करने में निर्माणाधीन सेलो सीएचपी की बहुत बड़ी भूमिका होगी। उन्होंने आगे कहा कि जीवीटीसी की स्थापना होने के बाद सुलभ तौर पर प्रशिक्षण मिलने से कामगारों के दक्षता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। कामगारों व ग्रामीणों के स्वास्थ्य का यहां पूरा ख्याल रखा जाता है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए 14 टैंकर एवं दो मिस्ट कैनन संचालित हैं। इसके साथ हीं कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों को भी उन्होंने साझा कर ध्यानाकर्षण कराया। पश्चात डीजीएमएस एजाज मोहम्मद के साथ निरीक्षण टीम ने खनन क्षेत्रों का जायजा लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिये। इस मौके पर राकेश रंजन, परियोजना पदाधिकारी मो.अकरम, डिस्पैच अधिकारी शशिकांत भारती, सुरक्षा अधिकारी अशोक कुमार, कोलियरी इंजिनियर राजीव रंजन, डीजीएम इमामुद्दीन, मैनेजर अनूप भगत, सीएसआर अधिकारी मोहसिन रज़ा समेत कई अधिकारी, कामगार तथा स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे।

















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