मयूरहंड (चतरा)। झारखंड सरकार की जीरो टॉलरेंस के तहत सरकारी कार्यालयों में कार्यों का निष्पादन करने की घोषणा को आईना दिखा रहा है मयूरहंड प्रखंड में बना प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना। जिले में व्यापत भ्रष्टाचार का नजराना देखना हो तो मयूरहंड प्रखंड के दिग्ही आ जाइए। यहां आकर पता चल जाएगा कि चतरा जिले में कैसे विकास किया जा रहा है। इसके लिए सब का साथ, सब का विकास करने के लिए चतरा संसदीय क्षेत्र के सांसद एवं सिमरिया विधानसभा विधायक के साथ जिले के अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित करना चाहिए। उक्त बातें विकास से दुख झेल रहे दिग्ही के ग्रामीणों की है। वर्ष 2019-20 में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत आरईओ रोड से दिग्ही देवी मंडप तक लगभग 1.1 किलोमीटर लगभग 35 लाख की लागत से पक्की सड़क का निर्माण ग्रामीण विकास विभाग चतरा के अधिकारियों के देखरेख में कराई गई। य़ह सड़क नैनो टेक्नोलॉजी के माध्यम से निर्मित की गई थी। इतने गुणवत्ता युक्त सड़क का निर्माण संवेदक एवं विभागीय पदाधिकारियों द्वारा किया गया की पहली बरसात भी नहीं झेल पाया। पहली बरसात में ही लगभग दो सौ मीटर कालीकरण सड़क का नामोनिशान मीट गया। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के पहले साल से ही संबंधित विभाग के अधिकारियों को जर्जर सड़क मरम्मत करवाने की अर्जी लगाते आ रहे हैं। परतुं सम्बन्धित विभाग के पदाधिकारी एवं संवेदक द्वारा ग्रामीणों की अर्जी को नजर अंदाज कर कर दिया गया। जिसका परिणाम आज सड़क में तीन फिट गड्ढा बन गया है। जबकि संवेदक के साथ एकरारनामे में सड़क निर्माण के पांच वर्षों तक मेंटेनेंस की राशि विभाग के पास जमा होती है। बावजूद पांच सालों से दिग्ही के ग्रामीणों को बरसात के दिनों में घर से बाहर निकलने के लिए सोचना पड़ रहा है। ग्रामीण अपने वाहनों को चार माह बरसात में अगल बगल के गांवों में खड़ा कर पैदल घर पहुंचते हैं। अब ग्रामीणों को पांच वर्ष पूर्ण होने पर सड़क बनने की आश लगाने के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आता। सांसद एवं विधायक इतने सम्वेदनशील हैं, नहीं की ग्रामीणों की दर्द को समझें और विभागीय लापरवाही एवं भ्रष्टाचार में लिप्त सिस्टम को टोकें।