Home बिहार झारखंड देश-विदेश मनोरंजन खेलकूद क्राइम शिक्षा राजनीति स्वास्थ राशिफल
---Advertisement---

बांग्ला सांस्कृतिक मेला का समारोहपूर्वक हुआ समापन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा हर किसी को अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए

---Advertisement---
WhatsApp Group Join Now

सभी भाषा-संस्कृति को संरक्षित करना सरकार की प्राथमिकता: मुख्यमंत्री 

न्यूज स्केल डेस्क
रांची। सभी भाषा-संस्कृति की अपनी अलग अहमियत है। इससे उस भाषा से जुड़े समुदाय को अलग पहचान मिलती है। इसे संरक्षित और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेवारी है। भाषा की पकड़ जितनी मजबूत होगी, उतना ही मजबूत हमारा समाज और राज्य होगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 7 मई 2023 को डॉ. रामदयाल मुंडा स्टेडियम, रांची में आयोजित तीन दिवसीय बांग्ला सांस्कृतिक मेला के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हर किसी को अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए।

भाषा और संस्कृति के साथ राज्य को आगे ले जाने का प्रयास

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की जो संरचना है, उसने अलग-अलग भाषा और संस्कृति का व्यापक प्रभाव है। हमारी सरकार भाषा और संस्कृति के साथ राज्य को आगे ले जाने का लगातार प्रयास कर रही है। यहां रहने वाले हर समाज को मान- सम्मान के साथ जीने का मौका मिले, इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

झारखंड में बांग्ला भाषा का विशेष प्रभाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का जो भौगोलिक परिवेश है, उसमें कमोबेश सभी जिले की सीमा किसी ना किसी राज्य के साथ जुड़ी हुई है। विशेष कर पश्चिम बंगाल के साथ झारखंड के सबसे ज्यादा जिले जुड़े हैं। ऐसे में बांग्ला भाषा और संस्कृति का यहां प्रभाव पड़ना लाजमी है। यहां ऐसे कई लोग हैं जिनकी संपत्ति झारखंड और बंगाल दोनों राज्यों में है। सबसे बड़ी बात की बंगाल से उड़ीसा और बिहार राज्य बना एवं बिहार से झारखंड अलग राज्य बना। ऐसे में किसी ना किसी रूप में बांग्ला भाषा- संस्कृति यहां की धरती में रची बसी है। ऐसे में बिना बांग्ला के झारखंड के सांस्कृतिक विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है।

क्षेत्रीय भाषाओं को बिना जाने समझे झारखंड को आगे नहीं ले जा सकते

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में 10 से ज्यादा स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती है। यहां के ग्रामीण परिवेश में हिंदी से ज्यादा क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती है। ऐसे में राज्य के विकास में अहम जिम्मेदारी निभाने वाले हमारे अधिकारी अगर स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को नहीं समझेंगे, नहीं सीखेंगे और नहीं जानेंगे तो वे स्थानीय लोगों से कैसे संवाद स्थापित कर पाएंगे। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर हमने अपने अधिकारियों को कम से कम क्षेत्रीय भाषाओं को समझने और जानने को कहा है, ताकि वे ग्रास रूट पर लोगों के साथ सीधा संवाद कर उन्हें विकास योजनाओं का लाभ दे सकें।

विविधता में एकता ही हमारे देश की पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विभिन्न धर्म-समुदाय, भाषा, संस्कृति, रहन-सहन और वेशभूषा वाला देश है। यही विविधता में एकता हमारी देश की पहचान है। यह हमारे देश को मजबूती देती है और पूरी दुनिया इसका लोहा मानती है।

इस अवसर पर मंत्री आलमगीर आलम, सुप्रियो भट्टाचार्य, रांची के उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक समेत बांग्ला समुदाय के बड़ी संख्या में लोग शामिल थे।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र की पवित्रता को रौंदा है: मॉक पार्लियामेंट में नेहा बोरा का जोरदार हमला, CEC के खिलाफ महाभियोग की मांग

खेत की मेड़ पर मिला नवजात, पास में मिली पूजा-पाठ की सामग्री

सुरक्षित बचपन अभियान: बुनियादी और मध्य विद्यालय में कानूनी जागरूकता शिविर, बच्चों को बताए गए अधिकार

कोल परियोजना में 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन कोल ट्रांसपोर्टिंग ठप करने की घोषणा, रैयतों ने जीएम को सौंपा पत्र

तीन साल से खराब पड़ा ट्रांसफार्मर, एक के भरोसे पूरा गांव; लो वोल्टेज से हजारों ग्रामीण परेशान

एकमात्र हाई स्कूल में सिर्फ दो शिक्षक, मैट्रिक परीक्षा देंगे 60 विद्यार्थी; डीसी से मांगे गए शिक्षक

Leave a Comment