चतरा/हंटरगंज। राजस्थान के झालवाड़ की तस्वीरें अभी आप भूले नहीं होंगे जब एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से आठ मासूम बच्चे की मौत हुई थी। जिससे पूरे देश के लोगों ने सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़े किये थे। सरकार शिक्षा के स्तर को बेहतर करने, स्कूली बच्चों को अच्छी सुविधाएं, अच्छी बिल्डिंग और स्कूल में अच्छा माहौल देने के तमाम दावे करती है। लेकिन झारखंड में हकीकत इससे उलट है। चतरा जिले के हंटरगंज प्रखण्ड क्षेत्र के तिलहेत पंचायत अंतर्गत आने वाले गायघाट में संचालित प्राथमिक विद्यालय भवन की हालत काफी खस्ताहाल हो चुकी है। यहां बने कमरे की छत और दीवारें पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। इन सबके बीच छात्र जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल भवन की हालत ऐसी है कि, कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जिम्मेदारों की उदासीनता और लापरवाही का ही नतीजा है कि आज भी करीब 36 छात्र-छात्राएं अपनी जान जोखिम में डालकर पढाई करने को मजबूर हैं। स्कूल की तस्वीर और बच्चों की तकदीर दोनों सुधारने संवारने पर किसी का ध्यान नहीं है। ऐसे में बच्चों की भविष्य किस ओर जा रहा है इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं। विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि भवन की मरम्मत के लिए संबंधित विभाग को पत्र के माध्यम से जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। नतीजा यह है की बच्चों को खस्ताहाल कमरों में पढ़ाया जा रहा है। भवन के सुरक्षित स्थान के अभाव में सभी छात्रों को बरामदे में पढ़ाया जा रहा है। बच्चों के अभिभावकों और ग्रामीणों ने बताया कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डरते हैं। बच्चें खुद भी भय के माहौल में स्कूल आने से कतराने लगे हैं, जिससे उनके शिक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है। लेकिन जिम्मेदार पूरे मामले पर मौन है। जिला प्रशासन से ग्रामीणों और विद्यालय स्टाफ की मांग है की शीघ्र मरम्मत कराई जाए ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित किया जा सके और उनकी पढ़ाई बाधित ना हो। इधर पूछे जाने पर प्रखण्ड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी किशोर कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आया हैं टेंडर होते ही जल्द से जल्द भवन का निर्माण किया जाएगा।