न्यूज स्केल संवाददाता, अजित यादव
कुंदा(चतरा)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा मजदूरों के पलायन रोकने व स्थानीय तौर पर अकुशल श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने पर अब प्रश्न उठ रहे हैं। मजदूरों को मनरेगा से रोजगार देने के दावे पर सवाल उठना भी लाजमी है, क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर मनरेगा मजदूरों के पास इतनी पर्याप्त राशि नहीं होती है कि वह अपने परिवार का भरण पोषण अगले एक माह तक भी कर सके औऱ ऐसे में उन्हें तीन-चार महीने तक मजदूरी ना मिले तो उनके समक्ष रोजी-रोटी समेत परिवार के परवरिश का संकट उत्पन्न हो जाता है। अब ऐसे में मजदूर पलायन की ना सोचे तो क्या करे। मजदूरी में इतनी लंबी विलंब के कारण सक्रिय मजदूरों की स्थिति काफी दैनीय हो गई है। मजदूर बताते हैं की मजदूरी भुगतान में विलंब के कारण भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। स्थिति यह है की मजदूर अब कर्ज लेकर अपने परिवार का भरण पोषण करने को विवश है। वही मटेरियल की बात की जाय तो बिरसा कूप लाभुक कर्जदार हो गए हैं। उन्होंने बताया कि मनरेगा में सामग्री का भुगतान लगभग नौ महीने से नही हो पाया है। जबकि लाभुक कर्ज लेकर किसी तरह कार्य पूरा करवा लिए, लेकिन अब कर्ज पर ब्याज की राशी देनी पड़ रही है। मजदूरी भुगतान में विलंब को लेकर कार्यक्रम पदाधिकारी ने बताया की सरकार के द्वारा राशि उपलब्ध होते ही भुगतान कर दी जाएगी। वहीं बिरसा कूप सामग्री मद की राशि भुगतान को लेकर उन्होंने कहा की राज्य सरकार से आदेश मिल गई है जल्द ही भुगतान किया जाएगा।
मनरेगा मजदूरों का हाल बेहाल, तीन माह से नहीं हुआ मजदूरी का भुगतान

By newsscale
On: March 1, 2024 10:56 PM
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