न्यूज स्केल डेस्क
रांची। सोमवार का दिन झारखंड की राजनीति के लिए बेहद विशेष रहेग। सोमवार को ही विधानसभा में राज्य के नये सीएम चंपाई सोरेन विश्वास मत हासिल करेंगे। इसके लिए विधानसभा का विशेष सत्र 5-6 फरवरी को है आहूत। ज्ञात हो कि चंपाई सोरेन ने 2 फरवरी को राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वहीं राज्यपाल ने उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। नए सीएम 47 विधायकों के साथ बहुमत साबित करने का दावा किया है। फ्लोर टेस्ट से पहले चंपई सोरेन ने विधायकों को टूटने से बचाने के लिए काफी एहतियात बरती है। वहीं नाराज चल रहे विधायक लोबिन हेंब्रम और सीता सोरेन की भी नाराजगी अब खत्म हो चुकी है। दोनों भी फ्लोर टेस्ट में मौजूद हो सरकार के पक्ष में वोट करेंगे। दुसरी ओर हैदराबाद भेजे गए सत्तारूढ़ दल के सभी 35 विधायक भी रविवार शाम में रांची लौट गए हैं। सोमवार को सभी विधायक एक साथ विधानसभा पहुंचेंगे। जबकी फ्लोर टेस्ट में शामिल होने की इजाजत पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी कोर्ट से मिल गई है। ऐसे में अब झामुमो के पक्ष में 47 विधायकों का समर्थन जुट चुका है।
झारखंड विधानसभा का अंकगणित
झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्यों की संख्या है। जिसमें से एक सीट गांडेय फिलहाल खाली है। गांडेय से झामुमो के विधायक सरफराज अहमद इस्तीफा दे चुके हैं। अब 80 में से 48 विधायक स्पीकर सहित सत्ता पक्ष के समर्थन में हैं, जबकि 32 विधायक विपक्षी खेमे में हैं। सत्ता पक्ष में झामुमो 29, कांग्रेस 17 और राजद का 01 विधायक हैं। भाकपा माले ने भी सरकार को समर्थन दिया है। अगर निर्दलीय विधायक भी सरकार के समर्थन में वोटिंग करते है तो चंपाई सोरेन 49 वोटों के साथ बहुमत साबित कर सकते हैं। हालांकि निर्दलिय के सरकार को समर्थन करने की उम्मीद लगभग नहीं के बराबर है।

झारखंड विधानसभा में कुल सीट 81, एक सीट गांडेय खाली है। सत्ता पक्ष में 48 विधायक स्पीकर समेत। जिसमें झामुमो के 29, कांग्रेस के 17, राजद के 1 व भाकपा माले के 1 विधायक है। विपक्ष में भाजपा के 26, आजसू के 3, राकांपा के 01 व निर्दलीय 02 विधायक है।
लोबिन व सीता सोरेन चंपाई के साथ
हेमंत सोरेन के 31 जनवरी की रात इस्तीफे के बाद चंपाई सोरेन ने राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा किया था। उस समय उन्होंने राज्यपाल को जो पत्र सौंपा था, उसमें सत्ता पक्ष के सिर्फ 43 विधायकों के ही हस्ताक्षर थे। कांग्रेस, आरजेडी और माले ने तो पहले ही दिन चंपाई सोरेन को समर्थन दे दिया था। झामुमो के अपने दो नाराज विधायकों (सीता सोरेन और लोबिन हेंब्रम) के टूटने का डर सता रहा था, लेकिन चंपाई दोनो को मनाने में कामयाब हो गये हैं। सोरेन परिवार की बड़ी बहू सीता सोरेन ने चंपाई के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंच कर यह बता दिया कि वे सरकार के पक्ष में ही हैं। जबकी रविवार को लोबिन हेंब्रम ने भी झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन से मुलाकात कर सरकार के पक्ष में वोट देने की घोषणा कर दी है।
वापस लौटे हैदराबाद से सत्ता पक्ष के विधायक
चंपाई सोरेन के 2 फरवरी को शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सत्ता पक्ष के 35 विधायकों को हैदराबाद शिफ्ट किया गया था। जो सभी विधायक रांची रविवार शाम वापस लौट गए हैं। उन्हें एयरपोर्ट से सीधे सर्किट हाउस ले जाकर ठहराया गया है। सोमवार को फ्लोर टेस्ट के लिए एक साथ बस में बैठा कर विधानसभा ले जाया जाएगा। विपक्ष बहुमत के आंकड़े से काफी दूर है, फिर भी चंपाई ने एहतियात बरतते हुए अपने विधायकों को टूटने से बचाने के लिए हैदराबाद शिफ्ट कर दिया था।
फ्लोर टेस्ट में शामिल होंगे पूर्व सीएम हेमंत सोरेन भी
सोमवार को विधानसभा में चंपाई सरकार के फ्लोर टेस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल होंगे। रांची की पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें फ्लोर टेस्ट में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी है। हेमंत सोरेन ने विशेष पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) अदालत में याचिका दायर की थी। उन्होंने अपनी इस याचिका में चंपाई सोरेन सरकार के विश्वास मत में भाग लेने की अनुमति मांगी थी। जिसकी इजागत उन्हें मिली हुई है।




















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