कुमडांग खुर्द में 45.65 एकड़ जमीन पर फर्जी जमाबंदी का आरोप, सीओ ने ग्रामीणों से मांगे मूल कागजात, पूरे सत्यापन के बाद ही खनन की मांग पर अड़े रैयत
चतरा/टंडवा। जिले के टंडवा प्रखंड अंतर्गत आम्रपाली कोल परियोजना के कुमडांग खुर्द स्थित चौफाल की जमीन पर खनन सीसीएल के लिए परेशानी का कारण बन गया है। गुरुवार को उक्त जमीन पर खनन करने पहुंची एनसीसी कंपनी के कर्मियों और ग्रामीणों के बीच पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में तीखी नोकझोंक हुई। मशीनें पहुंचते ही ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया, जिससे मौके पर तनाव का माहौल बन गया।
ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए सीओ गौरव रॉय ने मौके पर पहुंचकर उनसे वार्ता की। उन्होंने ग्रामीणों से जमीन के मूल कागजात जमा करने को कहा, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। सीओ ने कहा कि जमीन पर दखल-कब्जा रखने वाले रैयत तो सामने आ रहे हैं, लेकिन जिन लोगों ने फर्जी कागजात बनवाए हैं, वे जमीन पर उपस्थित नहीं हो रहे हैं।
मामले में डीसी और एसी कार्यालय की ओर से जांच प्रतिवेदन मांगा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद फर्जी जमाबंदी रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, फिलहाल सीसीएल की ओर से भू-स्वामियों को एलपीसी जारी करने का आश्वासन दिया गया है।
इसके बाद ग्रामीणों ने चौफाल की 45.65 एकड़ जमीन में खाता संख्या 36 के प्लॉट संख्या एक की तीन एकड़ 20 डिसमिल जमीन पर झाड़ी की सफाई करने की अनुमति दी। वहीं, प्लॉट संख्या दो की 42.45 एकड़ जमीन सत्यापन के बाद देने की बात कही।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले पूरी जमीन का सत्यापन कराया जाए और वास्तविक रैयतों को उनका अधिकार दिया जाए। साथ ही, रैयतों को नौकरी देने के बाद ही जमीन पर कोयला खनन की अनुमति दी जाएगी। ग्रामीणों ने जमीन के स्वामित्व का विवाद सुलझाए बिना खनन का विरोध किया है।
चौफाल की खाता संख्या 36 के प्लॉट संख्या एक और दो में कुल 45.65 एकड़ जमीन है। आरोप है कि इसमें करीब 42 एकड़ जमीन की बाहरी भू-माफियाओं ने फर्जी जमाबंदी करा ली है। सूत्रों के अनुसार, भू-माफियाओं ने एलआरडीसी कोर्ट से अपने पक्ष में फैसला भी करा लिया है। इससे मूल रैयतों के दावों के सत्यापन में परेशानी आ रही है और उन्हें उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा है।
इसी वर्ष सात अक्टूबर को अंचल विभाग की ओर से इस संबंध में ग्रामसभा कराई गई थी। इसमें ग्रामीणों ने जयनारायण साव और परमेश्वर साव पर अवैध जमाबंदी कराने का आरोप लगाया था। ग्रामीणों ने ग्रामसभा में स्पष्ट किया था कि उक्त जमीन पर लालधारी सुंडी, विशुन सुंडी और राम सुंडी के वंशजों का दखल-कब्जा है।
भरोसे की पहचान — न्यूज स्केल लाइव




















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