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समाज विज्ञान में शोध की गुणवत्ता और मौलिकता पर व्याख्यान

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शोध में मूल्यवर्धन, प्रतिचयन और अर्थ निरूपण की भूमिका पर प्रो. अभय प्रसाद सिंह ने शोधार्थियों को दी जानकारी

हजारीबाग, झारखंड। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान विभाग में शनिवार को ‘समाज विज्ञान में शोध पद्धति’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजी डीएवी महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अभय प्रसाद सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने की।

प्रो. अभय प्रसाद सिंह ने शोध की उपयोगिता और उसकी मौलिकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि शोधार्थियों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उनका अध्ययन किसी निर्धारित क्षेत्र में सार्थक योगदान दे। शोध की भाषा में इसे ‘मूल्यवर्धन’ (Value Addition) कहा जाता है।

उन्होंने समाज विज्ञान में शोध की प्रमुख पद्धतियों पर चर्चा करते हुए बताया कि शोध के क्षेत्र में विषय-वस्तु विश्लेषण (Content Analysis) और आनुभविक (Empirical) अध्ययन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि किसी शोध के लिए उचित प्रतिचयन (Sampling) का चयन एक महत्वपूर्ण चुनौती होती है। व्याख्यान के दौरान उन्होंने सरल उद्देश्यपूर्ण यादृच्छिक प्रतिचयन का भी उल्लेख किया।

मुख्य वक्ता ने कहा कि शोध में गुणात्मक सामग्री को उचित स्थान देने से उसके निष्कर्षों की उपयोगिता नीति निर्माण के स्तर तक बढ़ सकती है। उन्होंने अर्थ निरूपण (Interpretation) को शोध प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

शोध कार्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को लेकर भी उन्होंने शोधार्थियों को सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शोध के अर्थ निरूपण जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों में मेटा और चैटजीपीटी जैसे एआई उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता से शोध की मौलिकता प्रभावित हो सकती है।

कार्यक्रम के दौरान विभाग की ओर से मुख्य वक्ता प्रो. अभय प्रसाद सिंह को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। शोधार्थियों ने शोध पद्धति से संबंधित कई प्रश्न भी मुख्य वक्ता के समक्ष रखे, जिनका उन्होंने जवाब दिया।

कार्यक्रम में पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. बीपी सिंह, विभागीय प्राध्यापक, बड़ी संख्या में शोधार्थी तथा द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अशोक राम ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अजय बहादुर सिंह ने किया।

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