परीक्षा शुल्क से लेकर खरीदारी और नियुक्ति-पदस्थापन तक मामलों की उच्चस्तरीय जांच की मांग, 17 सितंबर से आंदोलन की चेतावनी
हजारीबाग, न्यूज स्केल संवाददाता।
विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग में कथित प्रशासनिक, वित्तीय एवं शैक्षणिक अनियमितताओं का मामला अब राजनीतिक स्तर पर भी पहुंच गया है। इन मामलों को लेकर झारखंड छात्र मोर्चा के प्रतिनिधियों ने झामुमो केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय से मुलाकात कर उन्हें विस्तृत आवेदन सौंपा। छात्र मोर्चा ने विश्वविद्यालय एवं इसके अंतर्गत आने वाले महाविद्यालयों में लंबे समय से लंबित विभिन्न मामलों की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
छात्र मोर्चा की ओर से चंदन सिंह ने विनोद पांडेय को विश्वविद्यालय से संबंधित दस्तावेज और पूर्व में दिए गए आवेदनों की प्रतियां उपलब्ध कराईं। इस दौरान उन्होंने परीक्षा शुल्क, एडमिट कार्ड, महाविद्यालयों में कथित वित्तीय अनियमितता, सीएनडी विभाग, सीसीटीवी खरीद, बॉयज हॉस्टल के फर्नीचर की खरीद, नियुक्ति एवं पदस्थापन समेत विभिन्न मामलों की जानकारी दी।
छात्र हित और पारदर्शिता से समझौता नहीं : विनोद पांडेय
झामुमो केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है। छात्रों के हित और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
किसी व्यक्ति को निशाना बनाना उद्देश्य नहीं : चंदन सिंह
चंदन सिंह ने कहा कि छात्र मोर्चा का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि पूर्व में कई मामलों को लेकर आवेदन दिए गए, जांच समितियां गठित हुईं और आदेश भी जारी किए गए, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में अब सभी मामलों की समयबद्ध उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।
उन्होंने विश्वविद्यालय में छात्रों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की। छात्र मोर्चा के अनुसार विश्वविद्यालय में पीने का पानी, स्वच्छ शौचालय, कैंटीन, पुस्तकालय और बेहतर वाई-फाई जैसी सुविधाओं को दुरुस्त किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
कार्रवाई नहीं हुई तो 17 सितंबर से लोकतांत्रिक आंदोलन
छात्र मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि संबंधित मामलों में शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो 17 सितंबर से लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा। मोर्चा ने राज्यपाल सह कुलाधिपति, उच्च शिक्षा मंत्री एवं संबंधित अधिकारियों से भी मामले में गंभीरता से संज्ञान लेने की अपील की है।
छात्र मोर्चा ने विश्वविद्यालय के पिछले वर्षों के प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
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