कबड्डी, खो-खो और पारंपरिक खेलों में बच्चों व शिक्षकों ने लिया हिस्सा, प्रबंधक नीरज सिन्हा ने कहा- खेलों को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं
इटखोरी (चतरा)। इटखोरी प्रखंड स्थित द विजन पब्लिक स्कूल में शनिवार, 29 अगस्त को महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं और खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं बच्चों ने खेलकूद को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। सुबह की प्रार्थना सभा में मेजर ध्यानचंद हाउस के मेंटर अवधेश सर ने बच्चों को खेलकूद के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के साथ शारीरिक गतिविधियां भी जरूरी हैं। नियमित खेलकूद से शरीर स्वस्थ रहने के साथ मानसिक रूप से भी व्यक्ति सक्रिय और तनावमुक्त रहता है।
कबड्डी से लेकर स्टापू तक, बच्चों ने खूब उठाया आनंद
मेजर ध्यानचंद जयंती के उपलक्ष्य में विद्यालय परिसर में बच्चों के लिए अलग-अलग खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें कबड्डी, खो-खो, बुढ़िया कबड्डी अथवा गामिनी शैली कबड्डी के साथ भारत के पारंपरिक खेल स्टापू (कीट-कीट) जैसी खेल गतिविधियां शामिल रहीं।
खास बात यह रही कि इन खेलों में बच्चों के साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी भाग लिया। इससे विद्यालय परिसर में उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा। बच्चों ने पारंपरिक खेलों का जमकर आनंद लिया।
पारंपरिक खेलों को फिर से जीवन में शामिल करने की जरूरत : नीरज सिन्हा
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक नीरज सिन्हा ने छात्र-छात्राओं एवं शिक्षक-शिक्षिकाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं के जीवन में शारीरिक गतिविधियां कम होती जा रही हैं। उन्होंने खेलकूद को स्वस्थ जीवनशैली के लिए बेहद जरूरी बताया।
उन्होंने कहा कि केवल क्रिकेट और फुटबॉल तक ही खेलों को सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि भारत के पारंपरिक खेलों को भी दोबारा अपनी जिंदगी में शामिल करने की जरूरत है। उन्होंने शिक्षक-शिक्षिकाओं से अपील की कि वे अपने बचपन में खेले गए पारंपरिक खेलों को विद्यालय तक लाएं, बच्चों को उनके बारे में बताएं और उनके साथ स्वयं भी खेलें।

नीरज सिन्हा ने कहा कि बच्चों को पढ़ाने और सीखाने का प्रभावी माध्यम खेल भी है। खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाने और सिखाने से वे चीजों को आसानी से समझते हैं और लंबे समय तक याद रखते हैं। उन्होंने शिक्षक-शिक्षिकाओं से अपने बचपन की भूली-बिसरी खेल गतिविधियों को विद्यालय की नियमित गतिविधियों में शामिल करने का आह्वान किया, ताकि बच्चों को तनावमुक्त एवं आनंदपूर्ण शिक्षा का वातावरण मिल सके।
विद्यालय प्रबंधक ने विद्यालय के गणित एवं शारीरिक शिक्षा शिक्षक मंटू सर की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विभिन्न खेलों को लेकर मंटू सर का ज्ञान और अनुभव विद्यालय के बच्चों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों में खेल के प्रति रुचि बढ़ाने और उन्हें विभिन्न खेलों से जोड़ने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने बच्चों को पढ़ाई के साथ खेलकूद के महत्व का संदेश दिया। विद्यालय परिसर में पूरे आयोजन के दौरान उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा।





















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