आरोपी मानसिक रूप से बीमार निकला, बिहार पुलिस का जवान व ठेकेदार भी हिरासत में; हथियारों की आवाजाही पर उठे सवाल
चतरा। पुलिस अधीक्षक अनिमेष नैथानी के आवास के मुख्य द्वार के सामने दिनदहाड़े प्राइवेट बॉडीगार्ड की गोली मारकर हत्या के मामले में कई सनसनीखेज तथ्य सामने आए हैं। पुलिस ने मुख्य आरोपी बलबीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मामले में पूछताछ के लिए बिहार पुलिस के एक जवान, ठेकेदार और उसके चालक को भी हिरासत में लिया गया है।
मुख्यालय डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि गिरफ्तार आरोपी बलबीर सिंह ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि मृतक अतुल कुमार लगातार उससे खैनी मांगकर परेशान कर रहा था। इसी बात से नाराज होकर उसने अपने लाइसेंसी हथियार से अतुल के सिर में गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
आरोपी का आपराधिक इतिहास और मानसिक इलाज
डीएसपी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी बलबीर सिंह मानसिक रूप से बीमार है और उसका इलाज रांची स्थित रिनपास में चल रहा है। उसके पास से रिनपास का उपचार संबंधी दस्तावेज भी बरामद हुआ है। उन्होंने बताया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास भी रहा है। उस पर बिहार के नवीनगर थाना क्षेत्र में गोलीबारी सहित अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह इन मामलों में तीन वर्ष से अधिक समय तक जेल में भी रह चुका है।
बिहार पुलिस का जवान भी हिरासत में
पुलिस ने घटना के समय वाहन में मौजूद बिहार पुलिस के जवान सत्येंद्र कुमार को भी हिरासत में लिया है। उसके पास मौजूद सरकारी कार्बाइन को जब्त कर लिया गया है। वहीं, चतरा बाईपास निर्माण कार्य करा रहे बेलागंज (गया) निवासी ठेकेदार विनीत उर्फ रॉकी यादव और उसके चालक प्रसाद यादव से भी पूछताछ की जा रही है।
सरकारी बॉडीगार्ड की मौजूदगी पर उठे सवाल
जांच के दौरान यह सवाल भी सामने आया है कि बेलागंज की विधायक मनोरमा देवी के नाम से आवंटित सरकारी बॉडीगार्ड सत्येंद्र कुमार झारखंड में ठेकेदार के साथ कैसे मौजूद था। घटना के बाद वह कार्बाइन लेकर घटनास्थल से मुख्य सड़क की ओर दौड़ पड़ा था, जिसके बाद एसपी आवास पर तैनात जवानों ने उसे पकड़ लिया।
डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने कहा कि पुलिस यह जांच कर रही है कि बिहार पुलिस का जवान सरकारी हथियार के साथ झारखंड किस परिस्थिति में आया था और क्या उसने नियमानुसार चतरा पुलिस को इसकी पूर्व सूचना दी थी। पुलिस इस पूरे मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है। जांच के दायरे में हथियारों की वैधता, सरकारी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, अंतरराज्यीय आवाजाही के नियमों का पालन तथा घटना की वास्तविक परिस्थितियां शामिल हैं।
























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