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एल नीनो के प्रभाव से बचाव को लेकर किसानों को किया गया जागरूक

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केवीके में प्रशिक्षण कार्यक्रम, वैज्ञानिकों ने जलवायु अनुकूल खेती अपनाने की दी सलाह

चतरा। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), चतरा द्वारा मंगलवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के निदेशालय प्रसार शिक्षा के तत्वावधान में कुलपति की अध्यक्षता में संचालित एल नीनो प्रभाव प्रबंधन अभियान के तहत किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को एल नीनो के कारण मौसम में होने वाले बदलाव, अनियमित वर्षा तथा कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी देना एवं वैज्ञानिक एवं जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति ने एल नीनो से उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने के लिए किसानों को तकनीकी सलाह दी और बदलते मौसम के अनुरूप खेती की आधुनिक पद्धतियों को अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम में चतरा जिले के कई प्रगतिशील एवं समृद्ध किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कृषि विज्ञान केंद्र, चतरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. रवीन्द्र मोहन मिश्रा ने कहा कि एल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं के कारण वर्षा का वितरण असंतुलित हो जाता है, जिससे खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने किसानों से वर्षा जल संरक्षण, मौसम आधारित कृषि कार्य, मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रबंधन, कम अवधि एवं सूखा सहनशील किस्मों का चयन तथा फसल विविधीकरण अपनाने की अपील की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को समय-समय पर वैज्ञानिक सलाह एवं तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराता रहेगा।

वैज्ञानिक डॉ. सुनीता कुमारी ने किसानों को खेतों में नमी संरक्षण, जल प्रबंधन, कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी तथा मौसम पूर्वानुमान के अनुरूप कृषि कार्य करने की जानकारी दी। वहीं फार्म मैनेजर शिवेन्द्र कुमार दुबे ने उन्नत कृषि तकनीकों, फसल प्रबंधन तथा जलवायु अनुकूल खेती की वैज्ञानिक विधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान सहायक उपेन्द्र कुमार सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं तकनीकी सेवाओं की जानकारी देते हुए किसानों से इनका अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर प्रगतिशील किसान बसंती पन्ना, अनिल रजक, वीरेन्द्र कुमार एवं जोहानी टुटी सहित अनेक किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। किसानों ने बताया कि वैज्ञानिक तकनीकों, फसल विविधीकरण, उन्नत कृषि पद्धतियों तथा संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से खेती को अधिक लाभकारी और व्यावसायिक बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को एक सफल उद्यम के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के समापन पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों से मौसम आधारित कृषि सलाह का पालन करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ एवं जलवायु अनुकूल बनाने का आह्वान किया।

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