डीएम की बैठक के बीच कई वरीय अधिकारियों के मोबाइल पर आए मैसेज; कानाफूसी के बाद खुला राज; कुछ दिन पहले खुद डीएम भी हो चुके हैं इस हाईप्रोफाइल हैकिंग के शिकार, जांच में जुटी पुलिस
गया (बिहार): देश में आम जनता को अपना शिकार बनाने वाले साइबर अपराधियों के हौसले अब इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि उन्होंने सीधे तौर पर देश की शीर्ष नौकरशाही पर ही बड़ा हमला बोलना शुरू कर दिया है। बिहार के गया जी जिले में सोमवार की शाम साइबर गिरोह से जुड़े शातिर अपराधियों ने उप विकास आयुक्त (DDC) शैलेश कुमार दास का सरकारी मोबाइल फोन हैक कर लिया। मोबाइल हैक करने के बाद अपराधियों ने उनके आधिकारिक व्हाट्सएप (WhatsApp) के जरिए गया जी जिले के तमाम वरीय प्रशासनिक अधिकारियों को भारी-भरकम रुपये भेजे जाने से संबंधित लगातार मैसेज भेजना शुरू कर दिया।
प्रशासन के सबसे बड़े महकमे को निशाना बनाकर की गई इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पूरे प्रशासनिक गलियारे और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
डीएम शशांक शुभंकर की बैठक में बजने लगे फोन, अफसरों के बीच मची कानाफूसी
संयोगवश साइबर हैकिंग की यह सनसनीखेज घटना बिल्कुल उस समय घटित हुई, जब गया के जिला पदाधिकारी (DM) शशांक शुभंकर कलेक्ट्रेट (समाहारणालय) सभागार में जिले के सभी वरीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक अति महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक कर रहे थे। बैठक की गंभीरता के बीच एक साथ जिले के कई वरीय अधिकारियों के निजी और सरकारी मोबाइल फोन पर अचानक डीडीसी शैलेश कुमार दास के व्हाट्सएप नंबर से रुपयों की मांग और ट्रांसफर करने से संबंधित मैसेज धड़ाधड़ फ्लैश होने लगे।
एक ही समय पर डीडीसी द्वारा रुपयों की मांग किए जाने से संबंधित अजीबोगरीब मैसेज देखकर कलेक्ट्रेट सभागार में मौजूद सभी प्रशासनिक अधिकारियों के बीच अचानक कानाफूसी शुरू हो गई और बैठक का माहौल असमंजस में बदल गया।
दूसरे नंबर से संपर्क करने पर खुला राज, डीडीसी बोले— ‘व्हाट्सएप से आने वाले मैसेज फर्जी हैं’
बैठक के दौरान ही लगातार आ रहे संदिग्ध मैसेज को गंभीरता से लेते हुए वहां मौजूद अन्य वरीय अधिकारियों ने बिना समय गंवाए तुरंत डीडीसी शैलेश कुमार दास से उनके दूसरे मोबाइल फोन नंबर पर संपर्क स्थापित किया। संपर्क होते ही इस पूरे हाईप्रोफाइल ड्रामे और हैकिंग की सारी सच्चाई पानी की तरह साफ हो गई।
डीडीसी की ओर से रुपयों की मांग करने वाला वह मैसेज पूरी तरह बोगस और फर्जी निकला। डीडीसी शैलेश कुमार दास ने बैठक में मौजूद अधिकारियों को तुरंत सचेत करते हुए बताया कि उनका आधिकारिक मोबाइल फोन हैक हो चुका है और उनके व्हाट्सएप नंबर से जाने वाले किसी भी प्रकार के संदिग्ध मैसेज, पैसों की मांग या लिंक पर बिल्कुल ध्यान न दें और न ही कोई रिप्लाई करें।
सिविल लाइंस थाना प्रभारी शमीम अहमद तुरंत एक्टिव, तकनीकी टीम जुटी जांच में
इस संवेदनशील मामले को डीडीसी शैलेश कुमार दास ने बेहद गंभीरता से लिया और तत्काल गया के सिविल लाइंस थानाध्यक्ष शमीम अहमद से फोन पर संपर्क कर मामले की विधिक जानकारी दी। जिले के शीर्ष अधिकारी का फोन हैक होने की सूचना मिलते ही सिविल लाइंस थाना प्रभारी तुरंत फुल एक्शन मोड में आ गए और साइबर सेल व तकनीकी टीम के सहयोग से मामले की गहन छानबीन में जुट गए हैं। पुलिस अपराधियों के डिजिटल फुटप्रिंट और आईपी एड्रेस को ट्रैक करने का प्रयास कर रही है।
कुछ दिन पहले खुद गया डीएम शशांक शुभंकर भी बन चुके हैं शिकार
ज्ञात हो कि गया जी जिले में कलेक्ट्रेट के शीर्ष अधिकारियों का मोबाइल हैक होने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी साइबर गिरोह से जुड़े अपराधियों ने कुछ दिन पूर्व खुद गया के डीएम शशांक शुभंकर का भी मोबाइल फोन इसी तरह हैक कर लिया था। उस दौरान भी शातिर साइबर अपराधियों ने डीएम के फर्जी प्रोफाइल और नंबर का इस्तेमाल कर डीडीसी, एडीएम (ADM) सहित जिले के अन्य अनुमंडल पदाधिकारियों (SDO) को व्हाट्सएप मैसेज भेजकर आपातकालीन स्थिति बताकर रुपयों की मांग करना शुरू कर दिया था।
उस दौरान भी डीएम ने तत्परता दिखाते हुए खुद तुरंत एक्टिव हुए थे और गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार को इस पूरे मामले की कड़ाई से तकनीकी जांच करने का निर्देश दिया था। कलेक्ट्रेट के दो सबसे बड़े अधिकारियों को लगातार निशाना बनाए जाने के बाद अब जिले की साइबर सुरक्षा और फायरवॉल को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी गई है।





















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