लोहरदगा गैस एजेंसी के 1,457 घरों में फिर सुलगने लगा लकड़ी का चूल्हा; डिलीवरी बॉयज द्वारा अवैध वसूली पर IOCL की दो टूक— सिलेंडर की कीमत में ही शामिल है डिलीवरी चार्ज’
न्यूज स्केल लाइव
लोहरदगा: सूचना के अधिकार (RTI) के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के बिहार-झारखंड राज्य कार्यालय से मिली एक आधिकारिक जानकारी में लोहरदगा गैस एजेंसी (राणा चौक) को लेकर कई बड़े और बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरटीआई से प्राप्त सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन पाने वाले सैकड़ों गरीब परिवारों के घरों में आज गैस चूल्हा होने के बावजूद दोबारा रिफिल न कराने के कारण धुआं उठ रहा है, जो योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
53 फीसदी उज्ज्वला उपभोक्ताओं के घरों में नहीं जल पा रहा चूल्हा
दस्तावेजों के अनुसार, राणा चौक स्थित लोहरदगा गैस एजेंसी के पास वर्तमान में कुल 12,419 सक्रिय उपभोक्ता पंजीकृत हैं। इनमें से अब तक कुल 2,739 परिवारों को उज्ज्वला (PMUY) कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं, जो सरकारी नियमों के मुताबिक केवल महिला लाभार्थियों के नाम पर आवंटित हैं।
चौंकाने वाला आंकड़ा: हैरान करने वाली बात यह है कि इन 2,739 उज्ज्वला लाभार्थियों में से 1,457 उपभोक्ता (लगभग 53 प्रतिशत) ऐसे हैं, जिन्होंने कनेक्शन की स्थापना के बाद से आज तक (एक बार भी) सिलेंडर की दोबारा रिफिलिंग नहीं करवाई है। सिलेंडरों की आसमान छूती कीमतों या परिवारों की आर्थिक तंगी के कारण आधे से अधिक गरीब परिवार वापस पारंपरिक लकड़ी और उपले के चूल्हे पर लौटने को मजबूर हो गए हैं।
8,974 उपभोक्ताओं की आधार सीडिंग पूरी, 708 ने छोड़ी सब्सिडी
आरटीआई के तहत केंद्रीय लोक सूचना पदाधिकारी प्रतीक चटर्जी द्वारा दिए गए जवाब में एजेंसी की अन्य डिजिटल और सामाजिक गतिविधियों का विवरण भी सामने आया है:
डिजिटल पारदर्शिता: गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने और पारदर्शी व्यवस्था बहाल करने के लिए एजेंसी के 8,974 ग्राहकों का आधार (UID) सीडिंग कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
गिव इट अप मुहिम: लोहरदगा के संपन्न और जागरूक वर्ग के 708 उपभोक्ताओं ने देश हित में अपनी मर्जी से एलपीजी (LPG) सब्सिडी का परित्याग (‘गिव इट अप’) किया है।
कनेक्शनों की रफ्तार सुस्त: पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों को देखें तो लोहरदगा में नए गैस कनेक्शनों की रफ्तार में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। एजेंसी ने वर्ष 2023 में 238, वर्ष 2024 में 223 और बीते वर्ष 2025 में 220 नए गैस कनेक्शन जारी किए हैं।
delivery बॉयज की अवैध वसूली पर IOCL सख्त— ‘अलग से कोई चार्ज नहीं’
ग्रामीण और शहरी इलाकों में अक्सर एलपीजी डिलीवरी वाहनों या डिलीवरी बॉयज द्वारा होम डिलीवरी के नाम पर तय कीमत (RSP) से 20 से 50 रुपये ज्यादा वसूलने की शिकायतें आती हैं। इस पर आईओसीएल (IOCL) ने स्थिति पूरी तरह साफ करते हुए सख्त निर्देश जारी किया है:
RSP में शामिल है शुल्क: घरेलू एलपीजी सिलेंडर की होम डिलीवरी के लिए वितरक या एजेंसी को अलग से कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता है। डिलीवरी का खर्च पूरी तरह से सिलेंडर के रिटेल सेलिंग प्राइस (RSP) में ही पहले से समाहित (शामिल) होता है।
होम डिलीवरी अनिवार्य: केवल उन ग्राहकों को छोड़कर जो खुद एजेंसी के गोदाम पर जाकर ‘कैश एंड कैरी रीबेट’ (छूट) का लाभ लेते हैं, बाकी सभी उपभोक्ताओं के घर तक तय कीमत पर ही गैस पहुंचाना वितरक के लिए अनिवार्य है। यदि कोई अतिरिक्त पैसे मांगता है, तो उपभोक्ता शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
कालाबाजारी और ईपीएफ के सवालों पर कंपनी ने झाड़ा पल्ला, ‘व्यावसायिक गोपनीयता’ का दिया हवाला
आरटीआई आवेदक नितेश रंजन भास्कर द्वारा गैस की कालाबाजारी रोकने के प्रशासनिक उपायों, एक ही पते पर चल रहे मल्टीपल (फर्जी) कनेक्शनों की जांच और एजेंसी के 16 कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन व ईपीएफ (EPF) लाभ जैसे महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़े सवाल भी पूछे गए थे।
परंतु, आईओसीएल ने इन संवेदनशील मुद्दों पर यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि ये जानकारियां उनके मुख्य अभिलेखों में पृथक (अलग) रूप से संधारित नहीं की जाती हैं या ये ‘स्पष्टीकरण और मत’ की श्रेणी में आती हैं, जो आरटीआई अधिनियम के दायरे से बाहर हैं। वहीं, हर महीने लोहरदगा में आपूर्ति होने वाले सिलेंडरों की कुल संख्या को कंपनी ने ‘व्यावसायिक गोपनीयता’ (Commercial Confidence) बताते हुए साझा करने से साफ इनकार कर दिया।
संतुष्ट न होने पर 30 दिनों के भीतर राज्य प्रमुख के पास प्रथम अपील का विकल्प
लोक सूचना पदाधिकारी ने आरटीआई का जवाब देने में हुई प्रशासनिक और विभागीय देरी के लिए खेद व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यालय में आवेदनों की असामान्य रूप से अधिक संख्या होने के कारण यह विलंब हुआ। यदि आवेदक दी गई जानकारी से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे पत्र प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर बिहार-झारखंड राज्य कार्यालय के कार्यकारी निदेशक एवं राज्य प्रमुख अनुप कुमार सामन्तराय के समक्ष अपनी प्रथम अपील दर्ज करा सकते हैं।























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