
उपायुक्त को सौंपा गया ज्ञापन, आम्रपाली के आउटसोर्सिंग कंपनियों में रोजी रोजगार दिलाने की मांग

भ्रष्टाचार: बाहरी कामगार छीन रहे स्थानीय का रोजगार। सुलग रहा जोरदार आंदोलन की चिंगारी।एनसीसी और वेरिएंट पर शोषण और उपेक्षा का आरोप
16 मई को शिवपुर साइडिंग के विस्थापित परसान के ग्रामीणों ने भी उपायुक्त को सौंपा था ज्ञापन। 29 मई से आंदोलन की चेतावनी

शशि पाठक
टंडवा (चतरा) सीसीएल द्वारा संचालित आम्रपाली कोल परियोजना में कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनियां एनसीसी और वेरिएंट की मनमानी चरम पर है। लंबे दिनों के बाद विस्थापित -प्रभावित क्षेत्र के कामगारों को वंचित कर यहां बड़ी संख्या में बाहरी लोगों को रोजी रोजगार में जोड़ने से क्षुब्ध लोगों में अब जोरदार आंदोलन की चिंगारी सुलग रही है। इस बाबत चतरा उपायुक्त रवि आनंद से ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को मिलकर ज्ञापन सौंपा। जिसमें पिछले दिनों रविवार को शिवपुर, टेकठा, हाण्डू समेत अन्य गांवों के बड़ी संख्या में मौजूद लोगों की हुई बैठक में लिये गये निर्णयों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। बताया गया कि भारी प्रदूषण से स्थानीय लोगों का जीवन और जीविका पर यहां गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। वहीं आउटसोर्सिंग उक्त कंपनियां एनसीसी और वेरिएंट द्वारा स्थानीय युवाओं को रोज़ी रोजगार से वंचित रखे जाने के कारण तेजी पलायन हो रहा है एवं उनमें घोर आक्रोश भी पनप रहा है। उक्त मुद्दे पर शीघ्र पहल नहीं होने पर शिवपुर रेलवे साइडिंग तक कोल ट्रांसपोर्टिंग कार्य को पूरी तरह से ठप करने की भी चेतावनी दी गई है।
विदित हो कि एनसीसी (नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी) और वेरिएंट कोयले का खनन और ढुलाई का कार्य कर रही है। सूत्रों की मानें तो एनसीसी में रोजगार दिलाने के लिये एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय है जो रसूखदारों की पैरवी और पैसों के बदौलत सैंकड़ों बाहरी कामगारों को नियोजित कराया है। बहरहाल, ग्रामीण आगे कुछ दिनों तक जिला प्रशासन के रुख का इंतजार कर रहे हैं।आवेदन में जिप सदस्या देवन्ती देवी, मुखिया सुबेश राम, उमेश गंझु, लखन गंझु, लोकनाथ गंझु, प्रेम गंझु, साहेब गंझु समेत अन्य के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
दूसरी ओर एनसीसी और वेरिएंट के विरुद्ध रोजी- रोजगार को लेकर अंदरखाने में पनप रहे जोरदार आंदोलन की सुगबुगाहट का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि शिवपुर साइडिंग से विस्थापित गांव परसान के ग्रामीणों ने 16 मई को उपायुक्त से मिलकर आवेदन सौंपा है। ग्रामीण बाहरी कामगारों को यहां से हर हाल में खदेड़ना चाह रहे जो स्थानीय ग्रामीणों के हक अधिकारों पर कुंडली मारकर धीरे- धीरे बैठते जा रहे हैं। आवेदन में बगैर मुआवजा व अन्य समुचित लाभ दिये उनके जमीनों का बाजबरन अतिक्रमण कर कोयले की ढुलाई करने के गंभीर आरोप लगाये गये हैं। लिखित तौर पर 29 मई से कोयले की ढुलाई अवरुद्ध करने की चेतावनी दी गई है।जिसकी प्रति परियोजना प्रबंधन समेत तमाम प्रशासनिक अधिकारियों को भी दी गई है। लोगों की मानें तो दो तरफा पनप रहे ग्रामीणों का आंदोलन पर शीघ्र प्रशासनिक पहल नहीं होती है और अगर ये एकाकार हो जाता है तो आम्रपाली परियोजना प्रबंधन समेत आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिये तब स्थिति को संभालना यहां काफी मुश्किल हो जायेगा।




















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