WhatsApp Group Join Now

गुमला -इस ज्ञापन में निम्नलिखित मुख्य माँग हैं
१. आदिवासी समाज के पारंपरिक व्यवस्था ( जैसे पड़हा , डोकलो सोहर , इत्यादि ) के पदों पर धर्मांतरित आदिवासी नहीं बना रह सकता है । हर पद की धार्मिक और सामाजिक – दोनों जिम्मेदारी होती है । धर्मांतरित आदिवासी सामाजिक जिम्मेदारी तो निभा लेता है , लेकिन धार्मिक जिम्मेदारी नहीं निभा पाता है । इससे आदिवासी मूल आस्था और संस्कृति को गहरा नुकसान हो रहा है । इस विषय ओर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय समाज के पक्ष में है
२. एक और सुप्रीम कोर्ट निर्णय के अनुसार , बिना ग्राम सभा के अनुमति के चांगई सभा नहींकिया जा सकता है ।
३. नई पेसा नियमावली के द्वारा, ग्राम सभा पर गैर पारंपरिक पद थोपे जा रहे हैं जैसे कोषाध्यक्ष , अध्यक्ष , सचिव , इत्यादि । अतः यह माँग की जा रही है की पांचवीं अनुसूची के ग्राम सभा के पद , पारंपरिक नियमों के अनुसार हो इस “पारंपरिक उलगुलान” की शुरुआत खूँटी जिले में की जा चुकी है । इस उलगुलान में मुंडा , खड़िया , उरांव तथा संथाल समाज के पारंपरिक अगुआ जुड़े हैं । इसकी अगुवाई “रूढ़िजन्य जनजाति समन्वय समिति” द्वारा की जा रही है । इस समिति की संरक्षक निशा उरांव IRS हैं , अध्यक्ष महादेव मुंडा है , सदस्य सचिव पूर्णा मुंडा है ।
अन्य सदस्य निम्न हैं -महेंद्र – कहती मूली पड़हा ,फ़ौदा- दीवान राजी पड़हा ,जयराम – बेल पड़हा,कलावती – डोकलो खड़िया ,अग्नू – डोकलो खड़िया
बिरसा उरांव-राजी पड़हा प्रार्थना सभा लोहरदगा
सुधु भगत – राजी पड़हा प्रार्थना सभा लोहरदगा
कृष्णा उरांव- राजी पड़हा प्रार्थना सभा लोहरदगा शामिल हैं।





















Total Users : 965447
Total views : 2726343