ASI की 2000 पन्नों की सर्वे रिपोर्ट को अदालत ने माना आधार; 98 दिनों की वैज्ञानिक जांच के बाद आया बड़ा निर्णय, ‘वाग्देवी’ की मूर्ति वापसी पर भी चर्चा
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने युगों पुराने संघर्ष पर एक युगांतकारी फैसला सुनाया है। अदालत ने हिंदू पक्ष के दावों को संवैधानिक और ऐतिहासिक रूप से सही ठहराते हुए इस परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर माना है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह स्थल प्राचीन समय में संस्कृत शिक्षा का महान केंद्र और एक भव्य मंदिर रहा है।
फैसले की 5 मुख्य बातें:
मंदिर होने की पुष्टि: कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक साक्ष्य और ढांचे की प्रकृति यह साबित करती है कि यह परमार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित सरस्वती मंदिर है। यहाँ हिंदू पूजा की परंपरा कभी पूरी तरह लुप्त नहीं हुई थी।
मुस्लिम पक्ष को सुझाव: खंडपीठ ने मुस्लिम पक्ष को सुझाव दिया कि वे मस्जिद निर्माण के लिए राज्य सरकार से वैकल्पिक भूमि की मांग कर सकते हैं।
ASI को सौंपी जिम्मेदारी: पूरे परिसर के वैज्ञानिक संरक्षण और देखरेख का जिम्मा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंपा गया है।
सरस्वती प्रतिमा की वापसी: लंदन के म्यूजियम में रखी देवी वाग्देवी (सरस्वती) की मूल प्रतिमा को भारत वापस लाने की याचिकाकर्ताओं की मांग पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को विचार करने को कहा है।
ASI सर्वे बना आधार: 2024 में 98 दिनों तक चले वैज्ञानिक सर्वे की 2000 पन्नों की रिपोर्ट ने इस फैसले में निर्णायक भूमिका निभाई, जिसमें ढांचे के नीचे प्राचीन मंदिर के अवशेष मिलने के संकेत दिए गए थे।
क्या था विवाद और वर्तमान व्यवस्था?
हिंदू पक्ष: इसे ‘वाग्देवी’ का मंदिर मानता है, जो राजा भोज द्वारा 1034 ईस्वी में बनवाया गया था। मुस्लिम पक्ष: इसे ‘कमाल मौला मस्जिद’ बताता है और ASI की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण कहकर चुनौती देता रहा है। मौजूदा स्थिति: साल 2003 से लागू व्यवस्था के तहत, यहाँ हर मंगलवार को हिंदू समुदाय को पूजा और हर शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति दी जाती रही है।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मुस्लिम पक्ष इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। साथ ही, धार में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।





















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