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हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के रखरखाव पर उठे सवाल, जवाबदेही तय करने की मांग

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अनुष्का चक्रवर्ती की मौत के बाद रिपोर्ट उपलब्ध कराने में कथित परेशानी से व्यवस्था पर सवाल; अस्पताल प्रबंधन ने दी अपनी सफाई

हजारीबाग। शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पोस्टमार्टम रिपोर्टों के रखरखाव और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अधिवक्ता अनुष्का चक्रवर्ती की संदिग्ध मौत के बाद परिजन की ओर से पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखने का अनुरोध किए जाने पर कथित तौर पर हुई परेशानी ने अस्पताल की व्यवस्था पर ध्यान खींचा है। आरोप है कि कागजों में कस्टोडियन की जिम्मेदारी एक फार्मासिस्ट को सौंपी गई है, जबकि रिपोर्टों के वास्तविक रखरखाव में आउटसोर्सिंग कर्मचारी की भूमिका बताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

कस्टोडियन की जिम्मेदारी और वास्तविक व्यवस्था पर सवाल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में एनएचएम के एक फार्मासिस्ट को पोस्टमार्टम रिपोर्टों के रखरखाव के लिए कस्टोडियन बनाया गया था। इसके बावजूद आरोप है कि आउटसोर्सिंग कंपनी के तहत स्वीपर के पद पर कार्यरत राहुल नामक कर्मचारी के पास रिपोर्टें रखी जाती थीं। इससे महत्वपूर्ण चिकित्सकीय दस्तावेजों के सुरक्षित भंडारण, रिकॉर्ड संधारण और अधिकृत मांग पर उन्हें उपलब्ध कराने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आपराधिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि रिपोर्टों का आधिकारिक संरक्षक कौन है, उनके रखरखाव की जिम्मेदारी किसे सौंपी गई है और संबंधित दस्तावेजों तक पहुंच के लिए क्या प्रक्रिया निर्धारित है।

अनुष्का चक्रवर्ती की मौत के बाद बढ़ी चर्चा

अधिवक्ता अनुष्का चक्रवर्ती की संदिग्ध मौत के बाद उनकी परिजन ममता देवी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिखाने का अनुरोध किया था। आरोप है कि इस दौरान रिपोर्ट उपलब्ध कराने में परेशानी हुई। बताया जाता है कि अस्पताल के उपाधीक्षक की ओर से कहा गया कि संबंधित कर्मचारी बाहर गया है और फोन नहीं उठा रहा है। इसके बाद रिपोर्टों के वास्तविक रखरखाव और उन्हें उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। यदि किसी महत्वपूर्ण दस्तावेज को प्राप्त करने की प्रक्रिया किसी एक कर्मचारी की मौजूदगी पर निर्भर हो, तो ऐसी व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक हो जाती है। हालांकि, इस घटनाक्रम से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी जरूरी है।

पहले भी बदलती रही है जिम्मेदारी

सूत्रों के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्टों के संधारण की जिम्मेदारी पहले अन्य कर्मचारियों के पास थी। संबंधित कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रभार दूसरे कर्मी को सौंपे जाने और बाद में अनुबंध पर कार्यरत फार्मासिस्ट सुजीत कुमार को जिम्मेदारी दिए जाने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि प्रभार हस्तांतरण की प्रक्रिया और रिपोर्टों के व्यवस्थित रखरखाव को लेकर स्पष्टता नहीं रही। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन को नियुक्ति आदेश, प्रभार हस्तांतरण के दस्तावेज और रिपोर्टों के रिकॉर्ड की समीक्षा कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

अस्पताल उपाधीक्षक ने क्या कहा?

अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. करण के अनुसार, पहले पोस्टमार्टम रिपोर्टों के संधारण की अलग व्यवस्था थी, लेकिन अब मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पोस्टमार्टम के प्रभारी और संबंधित विभाग के माध्यम से रिपोर्टों का रखरखाव किया जाता है। उन्होंने बताया कि डिस्चार्ज से संबंधित सभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट कस्टोडियन को दी गई हैं। राहुल के पास रिपोर्ट रखे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि रिपोर्ट विभागाध्यक्ष की अलमारी में बंद हो सकती है। उपाधीक्षक के इस बयान के बाद भी रिपोर्टों के आधिकारिक संरक्षक, उनके सुरक्षित भंडारण और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है।

जांच और जवाबदेही तय करने की मांग

पोस्टमार्टम रिपोर्टों के रखरखाव को लेकर उठे सवालों के बीच अस्पताल प्रबंधन से पूरी व्यवस्था की समीक्षा करने की अपेक्षा की जा रही है। इसमें कस्टोडियन की नियुक्ति, प्रभार हस्तांतरण, रिपोर्टों के रिकॉर्ड, सुरक्षित भंडारण और अधिकृत व्यक्ति को रिपोर्ट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जांच शामिल होनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आउटसोर्सिंग कर्मचारी को इन दस्तावेजों तक पहुंच किस आधार पर प्राप्त थी और रिपोर्टों के रखरखाव की अंतिम जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी की है। पोस्टमार्टम रिपोर्टों की सुरक्षा और समय पर उपलब्धता न्यायिक प्रक्रिया की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाना जरूरी है।

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