आचार्य अमित कुमार मिश्रा ने बताया कोजागरी और रास पूर्णिमा का महत्व; “कौन जाग रहा है” का भाव है कोजागरी
चतरा। शरद पूर्णिमा को लेकर इस वर्ष श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कभी सुदूरवर्ती प्रखंड के रूप में पहचाने जाने वाले लावालौंग में भी सोशल मीडिया ने लोगों को पर्व की धार्मिक और आध्यात्मिक विशेषताओं से परिचित कराने में अहम भूमिका निभाई। जानकारी मिलने के बाद लोग पूरे दिन विधि-विधान से पर्व मनाने की तैयारियों में जुटे रहे। खासकर रात में चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा को लेकर लोगों में विशेष उत्सुकता रही।
आचार्य अमित कुमार मिश्रा ने बताया कि हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि वर्षभर में इसी रात चंद्रमा अपनी सभी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों को अमृततुल्य माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर भजन-पूजन करने वाले श्रद्धालुओं पर कृपा बरसाती हैं। इसी कारण इसे कोजागरी कहा जाता है, जिसका भाव है “कौन जाग रहा है”।
आचार्य ने बताया कि इस पर्व का भगवान श्रीकृष्ण से भी विशेष संबंध है। मान्यता है कि इसी पूर्णिमा की चांदनी रात में उन्होंने गोपियों के साथ महारास रचाया था, इसलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह पर्व प्रकृति, भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है।
उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर रातभर खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि चंद्रमा की किरणों के संपर्क से खीर में विशेष गुण आ जाते हैं और अगले दिन सुबह इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है। धार्मिक दृष्टि से इसे अमृत प्रसाद माना जाता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्रमा की रोशनी, शरद ऋतु के अनुकूल वातावरण और इस परंपरा के सांस्कृतिक महत्व को समझने की जरूरत है।
अमित कुमार मिश्रा के अनुसार शरद पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत, पारिवारिक एकजुटता और प्रकृति से जुड़ाव का भी प्रतीक है। सोशल मीडिया के माध्यम से नई पीढ़ी को भी परंपराओं और पर्व-त्योहारों की महत्ता जानने का अवसर मिल रहा है। यही कारण है कि लावालौंग जैसे ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्र में भी इस वर्ष शरद पूर्णिमा को लेकर विशेष जागरूकता और उत्साह दिखा।




















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