मतदाता सूची से उठी चिंगारी अब दिल्ली की सड़कों पर सियासी लपट बनकर सामने आने वाली है. आज कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेता स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की तैयारी में हैं. इस प्रदर्शन में विपक्षी दलों, युवाओं और नागरिक समाज के संगठनों को साथ लाने की अपील की गई है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को मार्च का ऐलान करते हुए कहा कि यह किसी एक पार्टी का आंदोलन नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखने वाले भारतीय नागरिकों की साझा आवाज होगी. उन्होंने कहा कि पार्टी, लिंग, जाति, समुदाय और राज्य की सीमाओं से ऊपर उठकर लोग मार्च में शामिल होंगे. विपक्ष की योजना सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपकर एसआईआर पर रोक लगाने, कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर कार्रवाई और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग रखने की है.
झारखंड से बंगाल तक, विपक्षी एकजुटता की कोशिश
इस प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता दिखाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने राज्य के सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली पहुंचने का निर्देश दिया है. वहीं, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के नेता भी इस विरोध अभियान से जुड़ने की तैयारी में बताए गए हैं. समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और वाम दलों के कार्यकर्ताओं को भी मार्च में जुटाने की कोशिश की जा रही है.

सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचेगा सियासी सवाल
मार्च विपक्ष के आंदोलन का अगला अहम पड़ाव माना जा रहा है. एक ओर विपक्ष मतदाता अधिकारों और चुनावी निष्पक्षता के सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उस पर लगाए गए आरोपों को लेकर राजनीतिक टकराव तेज है. दिल्ली में आज यह देखना अहम होगा कि विपक्ष अपनी मांगों को किस तरह रखता है और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सौंपे जाने वाले ज्ञापन में कौन-कौन से मुद्दे शामिल किए जाते हैं.





















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