आश्विन नवमी पर पारंपरिक गीत-संगीत से सजी महफिल, युवाओं को लोक संस्कृति से जोड़ने की अनूठी पहल
मयूरहंड (चतरा)। मयूरहंड प्रखंड के ढोढ़ी-मधनिया गांव में आश्विन मास की नवमी तिथि पर झुमर कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। पारंपरिक गीत-संगीत से पूरा गांव भक्तिमय और उत्सवी माहौल में सराबोर रहा। झुमर की मधुर धुन पर ग्रामीण जमकर झूमे। कार्यक्रम में महिला, पुरुष और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक झुमर गीतों ने लोगों का मन मोह लिया। जैसे-जैसे गीत-संगीत की महफिल आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे ग्रामीणों का उत्साह भी बढ़ता गया। कलाकारों की प्रस्तुति पर मौजूद लोग झूमने लगे और गांव में देर तक उत्सव जैसा माहौल बना रहा। ग्रामीणों ने पारंपरिक गीतों का भरपूर आनंद लिया और एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं।
झुमर झारखंड की लोक संस्कृति और ग्रामीण परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से पुरानी लोक कलाओं और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में झुमर जैसे आयोजन लोगों को आपस में जोड़ने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि त्योहारों के अवसर पर इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होने से गांव में आपसी मेल-जोल बढ़ता है। साथ ही युवा पीढ़ी को अपनी पारंपरिक संस्कृति और लोक संगीत से जुड़ने का सुंदर अवसर मिलता है। ग्रामीणों ने ऐसे आयोजनों को गांव की सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
इस तरह आश्विन नवमी के अवसर पर आयोजित झुमर कार्यक्रम ग्रामीणों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ लोक परंपरा से जुड़ने का एक यादगार अवसर बन गया।






















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