1989 में JMM से जुड़े, 2009 में पहली बार लड़ा विधानसभा चुनाव; 2019 में पहली जीत के बाद 2024 में लगातार दूसरी बार पहुंचे विधानसभा
गिरिडीह/झारखंड। सुदिव्य कुमार सोनू ने अपनी राजनीतिक पहचान केवल गिरिडीह के विधायक या राज्य सरकार के मंत्री के रूप में नहीं बनाई, बल्कि करीब तीन दशक तक झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) से जुड़े रहकर संगठन के भरोसेमंद नेताओं में अपनी जगह बनाई। पार्टी संगठन से लेकर सरकार तक उनकी सक्रिय भूमिका रही, जिसके चलते झामुमो में उनकी अलग पहचान बनी थी। उनके आकस्मिक निधन की खबर से पूरे झारखंड में शोक का माहौल है।
1989 में JMM से शुरू किया राजनीतिक सफर
सुदिव्य कुमार सोनू ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक सामान्य पार्टी कार्यकर्ता के रूप में की थी। वर्ष 1989 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की सदस्यता ग्रहण की। लंबे राजनीतिक सफर के दौरान उन्हें कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा, लेकिन शुरुआती चुनावी हार के बावजूद उन्होंने पार्टी का साथ नहीं छोड़ा और लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे।
2009 में पहली बार चुनावी मैदान में उतरे
वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में झामुमो ने उन्हें पहली बार गिरिडीह विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली और वे छठे स्थान पर रहे।
इसके बाद 2014 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया। इस चुनाव में उनका मुकाबला तत्कालीन विधायक और भाजपा प्रत्याशी निर्भय कुमार शाहाबादी से हुआ। हालांकि वे चुनाव नहीं जीत सके, लेकिन उनके प्रदर्शन में बड़ा सुधार हुआ और वे छठे स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच गए।
2019 में पहली बार बने गिरिडीह विधायक
लगातार दो चुनावों में अनुभव हासिल करने के बाद वर्ष 2019 में झामुमो ने फिर उन्हें गिरिडीह से उम्मीदवार बनाया। इस बार उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी निर्भय कुमार शाहाबादी से हुआ और सुदिव्य कुमार सोनू ने जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया।
वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें दोबारा गिरिडीह सीट से मैदान में उतारा। उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की और अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत की। इसके बाद हेमन्त सोरेन सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी मिली।
कई महत्वपूर्ण विभागों की संभाली जिम्मेदारी
2024 में दूसरी बार विधायक बनने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू को राज्य सरकार में महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए। उनके पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य जैसे विभागों की जिम्मेदारी थी। पार्टी संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहने और सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने के कारण उनका प्रभाव झामुमो के संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नजर आता था।
परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा
सुदिव्य कुमार सोनू, शंभूनाथ विश्वकर्मा के पुत्र थे। उनके आकस्मिक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वे अपने पीछे पत्नी, दो बेटियां और एक बेटे समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। इस कठिन समय में उनके बड़े भाई भी परिवार के साथ खड़े हैं।
उनके निधन के बाद झामुमो सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। पार्टी और सरकार में उनकी सक्रिय भूमिका तथा लंबे राजनीतिक संघर्ष को याद किया जा रहा है।
























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