आधा दर्जन गांवों में सड़क-पुल का अभाव, ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की उठाई मांग
कुंदा (चतरा)। कुंदा प्रखंड की नवादा पंचायत अंतर्गत उलवार, सिंदरी, बाचकूम, रंगनियातरी, इचाक और पचंबा समेत करीब आधा दर्जन गांवों के बच्चों की पढ़ाई बरसात के दिनों में प्रभावित हो रही है। गांवों से विद्यालय तक पहुंचने के लिए बच्चों को कच्ची सड़क के साथ उफनती नदी पार करनी पड़ती है। जलस्तर बढ़ने पर कई बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के दौरान नदी में पानी बढ़ने से बच्चों के साथ शिक्षकों का भी विद्यालय पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कई बार अधिक पानी होने के कारण पठन-पाठन पूरी तरह बाधित हो जाता है। पक्की सड़क और पुल के अभाव में हर वर्ष ग्रामीणों को ऐसी परेशानी झेलनी पड़ती है।
इस समस्या का असर केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और अन्य जरूरतमंदों को भी आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने में परेशानी होती है। उलवार गांव के ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ दिन पूर्व नदी में बाढ़ के कारण एक प्रसूता महिला को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका, जिससे नवजात की मौत हो गई। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल और पक्की सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन से गांवों को जोड़ने वाली पक्की सड़क और नदी पर पुल का जल्द निर्माण कराने की मांग की है, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और आपात स्थिति में लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।




















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