पति की गिरफ्तारी के तीन दिन बाद किया सरेंडर, माओवादी संगठन को बड़ा झटका
झारखंड | गिरिडीह
गिरिडीह और पारसनाथ जोन में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। भाकपा (माओवादी) संगठन की सक्रिय एरिया कमेटी सदस्य अनिता किस्कू उर्फ बबिता ने राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति “नई दिशा-एक नई पहल” से प्रभावित होकर हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। उसने पुलिस केंद्र गिरिडीह में एसपी डॉ. बिमल कुमार, द्वितीय कमान अधिकारी अभिनव आनंद और अपर पुलिस अधीक्षक सुरजीत कुमार की मौजूदगी में औपचारिक रूप से सरेंडर किया।
मूल रूप से बोकारो जिले की रहने वाली 30 वर्षीय बबिता पारसनाथ जोन, लुगु पहाड़ी, झुमरा पहाड़ी और कोल्हान क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय थी। वह 25 लाख रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी और स्पेशल एरिया कमेटी (एसएसी) कमांडर अजय महतो उर्फ टाइगर की पत्नी है, जिसे गिरिडीह पुलिस ने तीन दिन पहले गिरफ्तार किया था।
आत्मसमर्पण के दौरान बबिता ने बताया कि वर्ष 2009 में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान वह माओवादियों के संपर्क में आई और संगठन में शामिल हो गई। वर्ष 2017 में उसने जंगल में ही शीर्ष कमांडर अजय महतो से विवाह किया। संगठन में उसे लेवी वसूली और ग्रामीणों में दहशत फैलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
बबिता ने बताया कि संगठन के शीर्ष कैडरों द्वारा आर्थिक और शारीरिक शोषण, निर्दोष ग्रामीणों के साथ मारपीट और हिंसक गतिविधियों से वह मानसिक रूप से परेशान थी। पति अजय महतो की गिरफ्तारी के बाद उसका मनोबल पूरी तरह टूट गया और उसने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया।
पुलिस के अनुसार, बबिता के खिलाफ हत्या, लूट, विस्फोटक अधिनियम, आर्म्स एक्ट और यूएपीए समेत गंभीर धाराओं में गिरिडीह, बोकारो और कोल्हान क्षेत्र के विभिन्न थानों में कुल 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं। एसपी डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि 25 लाख के इनामी नक्सली कमांडर की गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसकी पत्नी का आत्मसमर्पण करना माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका है। उन्होंने अन्य सक्रिय नक्सलियों से भी हिंसा छोड़कर राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाते हुए मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की।























Total Users : 1087065
Total views : 2893509