*लोहरदगा जिला का डेढ़ मीट्रिक टन आम्रपाली आम कोलकाता से दुबई के लिए किया गया निर्यात*
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*आम निर्यात का वर्चुअल माध्यम से किया गया फ्लैग-ऑफ़*
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*लोहरदगा।*
लोहरदगा जिला का 1.5 मीट्रिक टन आम्रपाली आम आज कोलकाता से दुबई के लिए निर्यात किया गया। वर्चुअल माध्यम से इसका फ्लैग ऑफ कार्यक्रम कोलकाता स्थित एपीडा के मुख्यालय से हुआ। कार्यक्रम से एपीडा (APEDA) मुख्यालय से चेयरमैन अभिषेक देव, क्षेत्रीय प्रबंधक श्रीकांत मंडल, उद्यान विभाग झारखंड मणिमाला खलखो, लोहरदगा जिला से उप विकास आयुक्त राज महेश्वरम, डीडीएम नाबार्ड लोहरदगा, नाबार्ड के जिला समन्वयक और कुडू प्रखंड से आम की उत्पादक समूह सेनेम नेरेम किसान उत्पादक समूह की अध्यक्ष एमलेन कंडुलना जुड़ीं। सभी ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये।
अध्यक्ष, एपीडा ने भविष्य में लोहरदगा के साथ भावी निर्यात पर कार्य करने की इच्छा व्यक्त की और किसानों को इसी तरह भविष्य में भी सहयोग देने की बात कही।
*उपायुक्त ने कहा*
लोहरदगा जिला की इस उपलब्धि पर उपायुक्त संदीप कुमार मीना ने कहा कि यह लोहरदगा जिले से आम का पहला औपचारिक निर्यात है। इसका महत्व अत्यंत व्यापक है क्योंकि यह हमारी स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था के वैश्विक बाजारों से जुड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह जिला लंबे समय से अपने वन एवं खनिज संसाधनों के लिए जाना जाता रहा है। किंतु वर्ष 2017 से जिले ने सुनियोजित प्रयासों के माध्यम से अपनी एक नई पहचान बनानी शुरू की है।
बिरसा हरित ग्राम योजना तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से जिले में उद्यानिकी क्षेत्र का उल्लेखनीय विकास हुआ है। वर्ष 2017-18 से 2025-26 के बीच आम के बागानों का विस्तार बढ़कर 6,306 एकड़ तक पहुंच गया है, जिससे 7,288 किसान लाभान्वित हुए हैं। वर्तमान में जिले में लगभग 7.06 लाख फलदार पौधे विकसित हो चुके हैं। सेन्हा, भंडरा और कुडू सहित विभिन्न प्रखंडों में किसानों द्वारा स्थापित बागान इसकी सफलता के प्रमाण हैं।
आज लगभग 1,780 एकड़ क्षेत्र में आम के पौधे फल देने की अवस्था में पहुंच चुके हैं और करीब 1,860 किसान इस मौसम में उत्पादन कर रहे हैं। वर्ष 2026-27 में इन बागानों से लगभग 2,588 मीट्रिक टन आम उत्पादन का अनुमान है, जिसमें आम्रपाली प्रमुख किस्म है। इसके अतिरिक्त मल्लिका, हिमसागर एवं लंगड़ा जैसी किस्मों का भी उत्पादन हो रहा है।
पूर्व में लोहरदगा के आम मुख्य रूप से स्थानीय मंडियों तथा रांची, ओडिशा एवं आसपास के बाजारों में बेचे जाते थे। किसानों को सीमित मूल्य प्राप्त होता था तथा संगठित मूल्य श्रृंखला तक उनकी पहुंच नहीं थी। आज हम उन सीमाओं से आगे बढ़ते हुए एक नई शुरुआत कर रहे हैं।
यह उपलब्धि एपीडा (APEDA) के सतत मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग एवं सहयोगात्मक प्रयासों से संभव हो पाई है। एपीडा ने लोहरदगा जैसे जिले को अंतरराष्ट्रीय निर्यात प्रणाली से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके लिए हम उनके प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।
लोहरदगा की विशेषता इसकी विविध आम किस्में हैं। आम्रपाली के अलावा यहां मल्लिका, लंगड़ा, हिमसागर, फजली, गुलाब खास सहित अनेक किस्मों का उत्पादन होता है, जो भविष्य में निर्यात विस्तार की अपार संभावनाएं प्रस्तुत करती हैं।
यह निर्यात केवल एक शुरुआत है। पहली खेप के लिए आम्रपाली का चयन किया गया है, लेकिन हमारा दीर्घकालिक लक्ष्य लोहरदगा की उद्यानिकी क्षमता के आधार पर एक सुदृढ़ एवं विविधीकृत निर्यात प्रणाली विकसित करना है।
हम किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को निर्यात के लिए तैयार करने, आवश्यक पंजीकरण एवं जैविक प्रमाणीकरण उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहे हैं, ताकि वे सीधे वैश्विक बाजारों से जुड़ सकें। साथ ही संग्रहण केंद्र, ग्रेडिंग एवं सॉर्टिंग इकाइयों तथा प्री-कूलिंग सुविधाओं जैसी आधारभूत संरचनाओं का विकास किया जा रहा है, जिससे खेत से निर्यात तक उत्पाद की गुणवत्ता बनी रहे।
इसके अतिरिक्त कोल्ड चेन व्यवस्था एवं फसलोत्तर प्रबंधन को मजबूत किया जा रहा है, ताकि नुकसान कम हो तथा किसानों को अधिक लाभ प्राप्त हो। मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे उत्पादन का अधिकतम लाभ किसानों तक पहुंचे और अपव्यय कम हो।
एपीडा के सहयोग से हमारा लक्ष्य केवल दुबई तक सीमित नहीं है। भविष्य में खाड़ी देशों, यूरोप तथा अन्य प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाना हमारी प्राथमिकता है, जहां गुणवत्तापूर्ण एवं ट्रेस करने योग्य कृषि उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
हमारी सोच सरल है—लोहरदगा का प्रत्येक आम अपने लिए सबसे उपयुक्त और लाभकारी बाजार तक पहुंचे तथा प्रत्येक किसान को उसके उत्पाद का उचित और बढ़ता हुआ मूल्य प्राप्त हो।
मैं एपीडा, उद्यान विभाग, हमारे निर्यातक साझेदारों एवं किसान उत्पादक कंपनियों का हार्दिक धन्यवाद करता हूं, जिनके प्रयासों से यह उपलब्धि संभव हुई है। विशेष रूप से मैं हमारे किसानों को बधाई देता हूं, जिनकी मेहनत और विश्वास ने इस परिवर्तन को संभव बनाया है।
आज 1.5 मीट्रिक टन आम दुबई के लिए रवाना हो रहे हैं। कल हम ऐसे भविष्य की कल्पना करते हैं जहां विभिन्न किस्मों के आम, मजबूत संस्थागत व्यवस्थाएं, प्रमाणित उत्पादन क्लस्टर और विस्तृत अंतरराष्ट्रीय बाजार सीधे हमारे किसानों से जुड़े हों।
यह केवल एक निर्यात कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लोहरदगा के वैश्विक कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़ने की ऐतिहासिक शुरुआत है।





















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