36 करोड़ का डैम निर्माण कार्य विवादों में! ग्रामीणों ने लगाया घटिया सामग्री का आरोप, काम रोककर संवेदक को ब्लैकलिस्ट करने की मांग
न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो
चतरा। चतरा जिले में वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद क्षेत्र की सिंचाई और जल संरक्षण की उम्मीदों से जुड़े दूलकी डैम का निर्माण कार्य इन दिनों गंभीर विवादों में घिर गया है। लगभग 36 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्माणाधीन इस महत्वाकांक्षी परियोजना में स्थानीय ग्रामीणों ने गुणवत्ता में भारी अनियमितता और सरकारी राशि के बंदरबांट का खुला आरोप लगाया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित तकनीकी मानकों को ताक पर रखकर केवल लीपापोती की जा रही है, जिससे डैम की मजबूती और इसके भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सुनवाई न होने पर फूटा आक्रोश, ग्रामीणों ने ठप कराया काम
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने डैम निर्माण में हो रही गड़बड़ी को लेकर कई बार निर्माण एजेंसी (ठेकेदार) और संबंधित विभाग के अधिकारियों को चेतावनी दी थी और गुणवत्ता सुधारने की मांग की थी। लेकिन, मूकदर्शक बने अधिकारियों और संवेदक ने ग्रामीणों की शिकायतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। बार-बार आग्रह के बावजूद जब स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, तो ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। एकजुट होकर ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर कार्य को पूरी तरह ठप करा दिया और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर अड़ गए।
भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ रही योजना!
ग्रामीणों ने मौके पर मीडिया को बताया कि:
“डैम के निर्माण में बेहद घटिया दर्जे की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। यदि समय रहते इसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र तकनीकी जांच नहीं कराई गई, तो जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये की यह महत्वपूर्ण परियोजना भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगी और पहली बारिश में ही डैम के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगेगा।”
सांसद, विधायक और उपायुक्त से गुहार: ठेकेदार को करें ‘डिबार’
मामले के तूल पकड़ने के बाद ग्रामीणों ने चतरा सांसद, स्थानीय विधायक तथा चतरा उपायुक्त (DC) को पत्र लिखकर मामले की गंभीरता से अवगत कराया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि:
तत्काल एक स्वतंत्र तकनीकी टीम का गठन कर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
भ्रष्टाचार में संलिप्त दोषी अधिकारियों एवं संवेदक (ठेकेदार) पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
संबंधित संवेदक को तत्काल प्रभाव से डिबार (ब्लैकलिस्ट) करने की अनुशंसा की जाए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय एवं पारदर्शी जांच हो।
डैम की गुणवत्ता की तकनीकी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
दोषी संवेदक एवं जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज हो।
मानकों के अनुरूप गुणवत्ता सुनिश्चित करने के बाद ही पुनः कार्य प्रारंभ कराया जाए।
आरोप सही पाए जाने पर संवेदक को हमेशा के लिए सरकारी निविदाओं से डिबार किया जाए।
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सुधार नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि यह परियोजना चतरा क्षेत्र के गरीब किसानों और आम जनता के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। ऐसे में विकास के नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन को खुली चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही उच्चस्तरीय जांच कर गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की गई, तो इस जन-आक्रोश को और व्यापक रूप दिया जाएगा और वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की नैतिक जिम्मेदारी है, इसलिए इस मामले में अविलंब हस्तक्षेप कर कार्रवाई की जानी चाहिए।





















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