किसानों ने पहले ही दी थी करंट आने की सूचना,10 दिन बाद शुरू होना है खेती का सीजन; जवाहर यादव और चिंतामन यादव ने की मुआवजे की मांग
न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो
चतरा: चतरा जिले के पत्थलगड़ा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत नोनगांव में सोमवार को बिजली विभाग की घोर संवेदनहीनता और लापरवाही के कारण एक बड़ा हादसा हो गया। गांव में लगे एक बिजली ट्रांसफार्मर के अर्थिंग तार में अचानक तेज करंट प्रवाहित होने से दो मवेशियों (बैलों) की मौके पर ही तड़प-तड़प कर दर्दनाक मौत हो गई।
इस घटना के बाद से पीड़ित गरीब किसानों के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं ग्रामीणों ने बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ गहरा आक्रोश व्यक्त किया है।
ट्रांसफार्मर के बगल से गुजरते ही चपेट में आए बेजुबान मवेशी
प्राप्त जानकारी के अनुसार नोनगांव के दो मवेशी सामान्य रूप से ट्रांसफार्मर के बगल से होकर गुजर रहे थे। इसी बीच ट्रांसफार्मर को सुरक्षित रखने के लिए जमीन में लगाए गए अर्थिंग वायर (तार) में आ रहे तेज करंट की चपेट में दोनों बेजुबान आ गए। करंट का झटका इतना भीषण था कि दोनों मवेशियों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
घटना के तुरंत बाद मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत पावर सब-स्टेशन को फोन कर बिजली की आपूर्ति बंद कराई, जिससे एक बड़ा मानवीय हादसा टल गया।
नोनगांव के स्थानीय ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि ट्रांसफार्मर के पास लगे इस अर्थिंग में पिछले कई दिनों से लगातार करंट आ रहा था। ग्रामीणों ने इसकी मौखिक जानकारी बिजली विभाग को समय पर दे दी थी, ताकि इसे समय रहते ठीक किया जा सके।
इसके बावजूद बिजली विभाग इस गंभीर समस्या को पूरी तरह अनसुना कर दिया और कोई मरम्मत नहीं की। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि विभाग ने सूचना के अनुरूप समय पर तकनीकी खराबी को दुरुस्त कर दिया होता, तो आज यह दर्दनाक घटना नहीं घटती।
10 दिन बाद शुरू होनी है खेती, बैल मरने से जवाहर और चिंतामन के सामने बड़ी समस्या
करंट की चपेट में आने से मरे बैलों में से एक बैल नोनगांव निवासी जवाहर यादव का है तथा दूसरा बैल चिंतामन यादव का है। ये दोनों स्थानीय स्तर पर छोटे किसान हैं और पूरी तरह खेती-बारी पर ही निर्भर हैं।
परिजनों और ग्रामीणों ने बताया कि महज दस दिनों के बाद क्षेत्र में मानसूनी खेती का मुख्य समय आने वाला है। ऐसे में ऐन वक्त पर कृषि कार्य के मुख्य आधार (बैलों) के मर जाने से दोनों पीड़ित किसानों के सामने इस सीजन में खेती करने और परिवार चलाने की एक बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। दोनों पीड़ित गरीब किसानों ने जिला प्रशासन और बिजली विभाग के वरीय अधिकारियों से इस घोर लापरवाही के खिलाफ अविलंब उचित मुआवजे की मांग की है।
इंसान चपेट में आता, तो हो जाती बड़ी अनहोनी: ग्रामीण
आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग की इस ढुलमुल नीति के कारण आज तो बेजुबान जानवरों की जान गई है, लेकिन यदि कोई छोटा बच्चा, महिला या अन्य व्यक्ति अनजाने में इस अर्थिंग के संपर्क में आ जाता, तो गांव में एक बहुत बड़ी अनहोनी घटना घट सकती थी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पूरे प्रखंड क्षेत्र के जर्जर तारों और खतरनाक ट्रांसफार्मरों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे विभाग के खिलाफ आंदोलन करने को विवश होंगे।





















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