उपायुक्त के निर्देश पर गठित टीम ने देर शाम की छापेमारी, डॉक्टर और कर्मी पाए गए फरार; एक मरीज भर्ती मिला; संचालक और अन्य पर कसा शिकंजा
न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो
चतरा: चतरा जिला मुख्यालय स्थित बस स्टैंड के समीप संचालित मेदांता हॉस्पिटल की घोर लापरवाही से लावालौंग प्रखंड के चुकु गांव निवासी लाटो गंझू की 20 वर्षीय गर्भवती पत्नी बैजंती देवी और उनके आठ माह के अजन्मे बच्चे की दर्दनाक मौत के मामले को ‘न्यूज स्केल लाइव’ द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन में आ गया है। इस जघन्य मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए चतरा उपायुक्त रवि आनंद ने एक उच्चस्तरीय जांच टीम का गठन किया, जिसने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मेदांता हॉस्पिटल को पूरी तरह सील कर दिया है।
प्रशासन की इस अचानक हुई और बेहद सख्त कार्रवाई से चतरा शहर में अवैध और बिना मान्यता के दुकान की तरह चल रहे अन्य निजी नर्सिंग होम संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है।
देर शाम जांच करने पहुंची टीम, अस्पताल छोड़कर भागे डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी
उपायुक्त के सख्त निर्देश पर गठित इस उच्चस्तरीय टीम में प्रभारी सिविल सर्जन-सह-सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पंकज कुमार, चतरा अंचलाधिकारी (CO) अनिल कुमार और सदर थाना प्रभारी अवधेश सिंह मुख्य रूप से शामिल थे।
प्रशासनिक टीम ने रविवार की देर शाम अचानक चतरा बस स्टैंड स्थित कथित मेदांता हॉस्पिटल में छापेमारी की। टीम के आने की भनक लगते ही अस्पताल के सभी फर्जी डॉक्टर, संचालक और नर्सिंग कर्मी मौके से मरीज को भगवान भरोसे छोड़कर पिछले दरवाजे से फरार हो गए।
मकान मालिक ने उगला राज— ‘विकास यादव’ ने किराए पर लिया था मकान
जांच के दौरान अस्पताल परिसर में केवल मकान मालिक उपस्थित मिले। अधिकारियों द्वारा कड़ाई से पूछताछ किए जाने पर मकान मालिक ने खुलासा किया कि उसने विकास यादव नामक व्यक्ति व उसके सहयोगियों को इस भवन को केवल हॉस्पिटल (अस्पताल) संचालित करने के नाम पर भारी किराए पर दिया था। टीम ने भवन से संबंधित रेंट एग्रीमेंट और संचालकों के पते से जुड़े दस्तावेजों को जब्त कर लिया है।
अंदर भर्ती मिला सिमरिया का मरीज, एम्बुलेंस से भेजा गया सुरक्षित
हॉस्पिटल के भीतर जब अधिकारियों ने सघन तलाशी ली, तो वहां अमानवीय स्थिति देखने को मिली। अस्पताल के सारे स्टाफ के भाग जाने के बावजूद अंदर वार्ड में सिमरिया प्रखंड के कसारी गांव निवासी एक मरीज राहुल भुईंया लावारिस और गंभीर हालत में भर्ती मिला।
जांच टीम ने मानवता दिखाते हुए बिना समय गंवाए तत्काल सरकारी 108 एम्बुलेंस को मौके पर बुलाया और बीमार राहुल भुईंया को सुरक्षित तरीके से चतरा सदर अस्पताल भेजकर वहां के डॉक्टरों की देखरेख में भर्ती कराया।
ओपीडी, वार्ड और ओटी पर जड़ा सरकारी ताला, मुख्य गेट किया गया सील
मरीज को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद जांच टीम के अधिकारियों ने मेदांता हॉस्पिटल के भीतर बने ओपीडी (OPD), जनरल वार्ड, पैथोलॉजी लैब, ऑपरेशन थिएटर (OT) और मेडिकल स्टोर को खंगालने के बाद सभी कमरों पर सरकारी ताला जड़ दिया। इसके बाद अधिकारियों ने संयुक्त रूप से अस्पताल के मुख्य गेट (मेन एंट्रेंस) पर लाल कपड़ा बांधकर सरकारी मुहर के साथ उसे पूरी तरह सील (Lock & Seal) कर दिया।
इलाज में घोर लापरवाही की पुष्टि, संचालकों पर होगी एफआईआर: डॉ. पंकज कुमार
कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक जानकारी देते हुए जांच टीम के मुख्य सदस्य सह सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि मेदांता हॉस्पिटल में बिना रक्त मिलान (ब्लड क्रॉस-मैच) किए और बिना जरूरी मापदंडों के एक गर्भवती महिला को खून चढ़ाया गया था जिससे उसकी और बच्चे की मौत का मामला प्रकाश में आया था। अधिकारी का आधिकारिक बयान: “प्रारंभिक तकनीकी जांच के दौरान मृतका बैजंती देवी के इलाज में अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों द्वारा घोर लापरवाही, प्राक्कलित मानकों का उल्लंघन और अमानवीय व्यवहार बरतने का मामला पूरी तरह सच पाया गया है। इसी आधार पर उपायुक्त के आदेश से अस्पताल को सील कर दिया गया है। इस अवैध अस्पताल के संचालक विकास यादव और फरार डॉक्टरों के खिलाफ सदर थाने में हत्या व धोखाधड़ी की विभिन्न सुसंगत और गैर-जमानती धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जा रही है। चतरा की जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”





















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