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नर्सिंग होम की बेरहमी: गलत खून चढ़ाने से 8 माह की गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत, ₹25 हजार वसूलकर थमाई लाश

On: June 7, 2026 10:20 PM
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गांव में पसरा मातम; बिना मैचिंग किए रिश्तेदार का खून चढ़ाने का आरोप; पहले सील हो चुका है इसी संचालक का अस्पताल, अब बस स्टैंड के पास चल रहा था खेल

न्यूज स्केल Live ब्यूरो

चतरा: चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चुकु गांव से निजी नर्सिंग होम की घोर लापरवाही और अमानवीयता की एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। चतरा शहर में संचालित एक निजी नर्सिंग होम में गलत इलाज और बिना जांच के खून चढ़ाए जाने के कारण 20 वर्षीय एक गर्भवती महिला और उसके पेट में पल रहे आठ माह के मासूम अजन्मे बच्चे की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

इस घटना के बाद से चुकु गांव में कोहराम और मातम पसरा हुआ है। उग्र ग्रामीणों और परिजनों ने चतरा के बस स्टैंड के समीप संचालित कथित ‘मेदांता नर्सिंग होम’ प्रबंधन पर इलाज में जानबूझकर लापरवाही बरतने, अवैध वसूली करने और गलत इलाज कर हत्या करने का संगीन आरोप लगाते हुए चतरा उपायुक्त व स्वास्थ्य विभाग से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

तबीयत बिगड़ने पर मेदांता नर्सिंग होम लाए थे परिजन, पैसों के लिए बनाया दबाव

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लावालौंग प्रखंड के सुदूरवर्ती चुकु गांव निवासी लाटो गंझू की 20 वर्षीय पुत्रवधू और टेका गंझू की पत्नी बैजंती देवी गर्भावस्था के आठवें महीने में थी। शुक्रवार को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद चिंतित परिजन उसे बेहतर इलाज की उम्मीद में चतरा बस स्टैंड के पास स्थित मेदांता नर्सिंग होम लेकर पहुंचे।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में पैर रखते ही डॉक्टरों और प्रबंधन ने पैसों के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। अस्पताल प्रबंधन ने अलग-अलग किश्तों में इलाज और दवाओं के नाम पर परिजनों से करीब 25 हजार रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली। इसके बाद भी जब महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ, तो अस्पताल के डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन (ऑपरेशन से प्रसव) की बात कहते हुए अतिरिक्त 40 हजार रुपये की तत्काल मांग शुरू कर दी, जिसे देने में गरीब परिवार असमर्थ था।

रक्त के नाम पर महा-लूट: ₹9,500 में चढ़ाया बिना जांच का खून!

मृतका के परिजन विनोद गंझू और पति टेका गंझू ने अस्पताल के भीतर हुए खून के इस काले खेल का भंडाफोड़ करते हुए बताया:

  • जांच के नाम पर वसूली: रक्त चढ़ाने से पहले आवश्यक क्रॉस-मैचिंग और अन्य पैथोलॉजिकल जांच के नाम पर अस्पताल ने पहले ही ₹2,500 नगद वसूल लिए।

  • रिश्तेदार का ही खून लिया और पैसे भी ऐंठे: महिला को एक यूनिट ब्लड की आवश्यकता थी। अस्पताल ने बाहर से खून लाने के बजाय मरीज के ही एक रिश्तेदार को बुलाकर उसका खून (ब्लड) निकाला। हद तो तब हो गई जब अपने ही रिश्तेदार का खून देने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने उस ब्लड पैकेट को चढ़ाने के एवज में ₹9,500 की अवैध वसूली कर ली।

  • नहीं की गई ब्लड मैचिंग: पति टेका गंझू का सीधा आरोप है कि उनके रिश्तेदार का खून लेकर सीधे महिला को चढ़ा दिया गया, लेकिन ब्लड ग्रुप या अन्य गंभीर संक्रमणों की कोई आवश्यक तकनीकी जांच (क्रॉस-मैच) नहीं की गई।

खून चढ़ते ही बिगड़ी हालत, जबरन छुट्टी देकर पल्ला झाड़ा

परिजनों ने बताया कि बिना जांच के गलत तरीके से खून चढ़ाए जाने के तुरंत बाद बैजंती देवी के शरीर में रिएक्शन होने लगा और उसकी स्थिति लगातार बदतर होती चली गई। परिजनों द्वारा हंगामा करने और मरीज की हालत बिगड़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने अपनी गर्दन फंसती देख आनन-फानन में मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज (छुट्टी) कर दिया और वहां से जाने को कह दिया।

अस्पताल से निकलने के कुछ ही समय बाद तड़पते हुए महिला और उसके गर्भ में पल रहे मासूम बच्चे ने दम तोड़ दिया। एक साथ दो मौतों से पूरे गांव का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

बगरा में पहले सील हो चुका है इसी संचालक का अस्पताल: स्वास्थ्य विभाग मौन क्यों?

इस घटना के बाद निजी नर्सिंग होम के संचालकों का एक बेहद चौंकाने वाला और पुराना आपराधिक इतिहास सामने आया है। स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार:

पुराना इतिहास: इस कथित मेदांता अस्पताल के संचालक पहले सिमरिया प्रखंड के बगरा क्षेत्र में भी इसी तरह का एक अवैध नर्सिंग होम संचालित करते थे। वहां भी कुछ समय पहले इसी प्रकार गलत इलाज के कारण एक मरीज की मौत हो गई थी, जिसके बाद भारी बवाल हुआ था और जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने उस अस्पताल को ‘सील’ कर दिया था।

बगरा में दुकान बंद होने के बाद इन रसूखदार संचालकों ने अपनी जगह बदली और चतरा बस स्टैंड के पास ‘मेदांता’ जैसे बड़े और प्रतिष्ठित ब्रांड के नाम का दुरुपयोग कर नया अवैध नर्सिंग होम खोल दिया, जहां फिर से मौत का यह तांडव देखने को मिला है। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से इस रैकेट की भी जांच कराने की मांग की है कि आखिर सील होने के बाद इन्हें दोबारा लाइसेंस किसने और कैसे दे दिया?

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