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कोल रोड विवाद का दूसरा दिन: वृंदा मोड़ पर डटे आंदोलनकारी, 5 जून को चक्का जाम का अल्टीमेटम; दूसरी तरफ समर्थन के लिए सजने लगा अलग पंडाल

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प्रशासनिक रोक के बावजूद गैरमजरूआ प्लॉट 329 और 333 पर खुदाई का आरोप, आमने-सामने आए विस्थापित और जमीन दाता रैयत; टकराव की आशंका को देख प्रशासन अलर्ट मोड पर

न्यूज स्केल लाइव

टंडवा (चतरा): एनटीपीसी की चट्टीबरियातू कोल माइंस से कोयला ढुलाई के लिए बनाई जा रही प्रस्तावित सड़क को लेकर टंडवा प्रखंड का बृंदा मोड़ अब आंदोलन का अखाड़ा बनता जा रहा है। बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी प्रभावितों और रैयतों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन जारी रहा।

धरना स्थल पर सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष डटे हुए हैं, जो जेआरएल (JARL) कंपनी और एनटीपीसी के खिलाफ लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। दूसरे दिन के इस धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता भी विनय बिहारी शरण ने की, जबकि मंच संचालन जितेंद्र सिंह द्वारा किया गया।

आंदोलनकारियों का आरोप— ‘अंचल कार्यालय की रोक के बाद भी कंपनी कर रही अवैध खुदाई’

धरने पर बैठे ग्रामीणों ने कंपनी की कार्यशैली और स्थानीय प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:

  • सरकारी आदेश का उल्लंघन: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि मौजा वृंदा स्थित खाता संख्या 29, प्लॉट संख्या 329 एवं 333 (जो कि जांच में गैरमजरूआ सरकारी भूमि पाई गई है) पर अंचल कार्यालय द्वारा रोक लगाए जाने के बावजूद कंपनी ने नियमों को ताक पर रखकर जबरन भूमि खुदाई और सड़क निर्माण का कार्य जारी रखा।

  • कोई विभागीय पत्र नहीं: विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि इस सड़क निर्माण से संबंधित कोई भी वैध विभागीय आदेश या सक्षम प्राधिकारी का सरकारी पत्र अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, जो इस पूरे काम को संदेहास्पद बनाता है।

  • बढ़ेगा जान-माल का खतरा: टंडवा-सिमरिया मुख्य सड़क स्थित वृंदा देवी मंडप के समीप से इस भारी कोल ट्रांसपोर्टिंग सड़क को जोड़ने से पूरे क्षेत्र में प्रदूषण का ग्राफ बढ़ेगा और तीखे मोड़ के कारण रोजाना भीषण सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहेगी।

कोल रोड निर्माण पर आर-पार: वृंदा मोड़ पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू, 5 जून से चक्का जाम की चेतावनी; दूसरी ओर जमीन दाता रैयतों ने विरोध को बताया निजी स्वार्थ

टकराव की आहट: समर्थन में भी उतरने लगे रैयत, सजने लगा दूसरा पंडाल

इस पूरे विवाद में अब एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ आ गया है। जहाँ एक तरफ सड़क निर्माण का तीव्र विरोध हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस सड़क के समर्थन में भी एक बड़ा धड़ा खुलकर मैदान में आ गया है।

एग्रीमेंट का हवाला: जमीन दाता रैयतों ने सड़क निर्माण के समर्थन में धरना-प्रदर्शन करने के लिए आंदोलन स्थल के समीप ही एक अलग पंडाल लगाना शुरू कर दिया है। इन रैयतों का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने अपनी निजी जमीन विधिवत एग्रीमेंट (समझौते) के तहत जेआरएल कंपनी को सौंपी है। उनका आरोप है कि कुछ लोग विकास विरोधी हैं और अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए जानबूझकर इस जनकल्याणकारी सड़क का विरोध करने का ढोंग रच रहे हैं।

5 जून को ‘महा चक्का जाम’ का ऐलान, अलर्ट मोड पर स्थानीय प्रशासन

इधर, विरोध कर रहे आंदोलनकारियों ने अपने कड़े रुख को दोहराते हुए साफ कर दिया है कि जब तक निर्माण कार्य पर पूर्ण रूप से रोक नहीं लगती और ग्रामसभा की सहमति नहीं मिलती, वे पीछे नहीं हटेंगे। ग्रामीणों ने 5 जून से पूरे क्षेत्र में अनिश्चितकालीन चक्का जाम करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

एक ही जगह पर विरोध और समर्थन में दो अलग-अलग पंडाल सजने और चक्का जाम की घोषणा के बाद क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच सीधे हिंसक टकराव की आशंका काफी बढ़ गई है। स्थिति की गंभीरता और संभावित विवाद को देखते हुए टंडवा अंचल और पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। धरना स्थल पर खुफिया तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की तैयारी की जा रही है।

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