कोयला ढोने वाले वाहनों के खिलाफ फूटा गुस्सा; बाल-बाल बचीं कई जिंदगियां, सांसद प्रतिनिधि ने जिला प्रशासन से चतरा क्षेत्र में ‘नो एंट्री’ जोन घोषित करने की उठाई मांग
टंडवा | न्यूज स्केल लाइव
चतरा जिले के टंडवा कोयलांचल क्षेत्र में कोयला ढुलाई (कोल ट्रांसपोर्टिंग) में लगी निजी कंपनियों की लापरवाही और उनके बेलगाम भारी वाहनों (हाईवा) का खूनी तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। हजारीबाग जिले के केरेडारी-चट्टीबरियातू एनटीपीसी (NTPC) कोल परियोजना से लेकर कटकमसांडी रेलवे साइडिंग तक चौबीसों घंटे कोयला ढोने वाली ‘गोदावरी कंपनी लिमिटेड’ के बेलगाम हाईवा इन दिनों आम जनता के लिए साक्षात यमदूत साबित हो रहे हैं।
रफ्तार और लापरवाही का ताजा और खौफनाक उदाहरण शनिवार को चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र अंतर्गत मिश्रौल में देखने को मिला, जहाँ गोदावरी कंपनी के एक तेज रफ्तार अनियंत्रित हाईवा ने सड़क किनारे स्थित प्रदीप तिवारी के आवासीय मकान और थोक राशन दुकान-सह-गोदाम को बुरी तरह ढहाते हुए भीतर जा घुसा।
राशन दुकान और गोदाम जमींदोज, लाखों का माल तबाह; बाल-बाल बचीं मासूम जिंदगियां
प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदीप तिवारी मिश्रौल इलाके के बड़े थोक एवं खुदरा राशन विक्रेता हैं। उनके इसी मकान और उससे सटे विशाल गोदाम में भारी मात्रा में कीमती राशन सामग्री (चावल, गेहूं, चीनी, तेल व अन्य आवश्यक वस्तुएं) रखी हुई थीं। तेज रफ्तार हाईवा के सीधे घर के भीतर दाखिल होने से पूरा पक्का ढांचा ढह गया और गोदाम में रखा लाखों रुपये का राशन का सामान मलबे और कोयले की कालिख में दबकर पूरी तरह बर्बाद हो गया।
इस भयावह हादसे के वक्त घर के भीतर परिवार के सदस्य मौजूद थे, जो मलबे की चपेट में आने से महज कुछ सेकंड के फासले से बाल-बाल बच गए, अन्यथा कोयलांचल में आज मौतों का एक बहुत बड़ा सैलाब देखने को मिलता। हादसे के बाद पूरे मिश्रौल गांव में भारी अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।
आक्रोशित ग्रामीणों ने किया चक्का जाम, गोदावरी कंपनी की ट्रांसपोर्टिंग पूरी तरह ठप
इस बड़ी दुर्घटना और भारी नुकसान से स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित ग्रामीणों ने घटनास्थल पर जुटकर चतरा-टंडवा मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। ग्रामीणों ने पीड़ित प्रदीप तिवारी को उचित और पूर्ण बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा देने की मांग को लेकर गोदावरी कंपनी लिमिटेड की तमाम कोयला ढुलाई वाली गाड़ियों को बीच सड़क पर रोककर ट्रांसपोर्टिंग को पूरी तरह ठप (चक्का जाम) कर दिया है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रबुद्ध जनों ने इसकी त्वरित सूचना अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) सिमरिया, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) टंडवा सन्नी वर्धन तथा पुलिस इंस्पेक्टर टंडवा को दे दी है। समाचार प्रसारित होने तक ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर सड़क पर डटे हुए हैं और वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।
अधिकारियों की कड़क चेतावनी हवा, ‘एक हाईवा-दो चालक’ का नियम ताक पर; सोते-सोते चला रहे गाड़ी
स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का सीधा आरोप है कि सिमरिया एसडीओ और टंडवा पुलिस प्रशासन के कड़े निर्देशों व चेतावनियों के बावजूद गोदावरी लिमिटेड कंपनी के प्रबंधन और ट्रांसपोर्टरों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
नियमों की धज्जियां उड़ाने का इनसाइड सच: पूर्व में लगातार हो रही मौतों को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) द्वारा स्पष्ट नियम लागू किया गया था कि रात्रि और लंबी शिफ्ट में चलने वाले एक कोल वाहन में अनिवार्य रूप से दो चालकों (Two Drivers) को रखा जाएगा, ताकि थकावट न हो. इसके बावजूद गोदावरी कंपनी द्वारा अत्यधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में एक हाईवा पर सिर्फ एक ही ड्राइवर से 24-24 घंटे काम लिया जा रहा है. नतीजतन, देर रात और भोर में वाहन चलाते समय चालकों की आंख लग जाती है (सो जाते हैं) और गाड़ियां सीधे लोगों के घरों और दुकानों में घुसकर मौत का तांडव मचा रही हैं.
“चट्टीबरियातू कोल प्रोजेक्ट से चतरा को सिर्फ मौत और प्रदूषण, अविलंब लगे नो एंट्री” : ईश्वर दयाल पांडे
इस भीषण सड़क हादसे और कोयलांचल की बदहाली पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए सांसद प्रतिनिधि ईश्वर दयाल पांडे ने चिंता जताई है और चतरा जिला प्रशासन से अविलंब कड़े कदम उठाने की मांग की है।
सांसद प्रतिनिधि ने दोटूक लहजे में जिला प्रशासन से विधि-व्यवस्था और जनहित को देखते हुए टंडवा-मिश्रौल रूट को तत्काल ‘नो एंट्री जोन’ (No Entry Zone) घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा:
“चट्टीबरियातू कोयला खनन परियोजना से चतरा जिले को किसी भी तरह का कोई विशेष आर्थिक या सामाजिक फायदा नहीं है। हजारीबाग के कोयले को ढोकर चतरा की सड़कों को तोड़ा जा रहा है और यहाँ के नागरिकों को सिर्फ और सिर्फ भीषण सड़क दुर्घटनाएं, जानलेवा प्रदूषण और मानसिक प्रताड़ना जैसी गंभीर समस्याएं उपहार में मिल रही हैं। गोदावरी कंपनी के कोयला वाहनों पर चतरा सीमा के भीतर पूर्ण रूप से नो एंट्री लागू की जानी चाहिए और पीड़ित तिवारी परिवार को जब तक पाई-पाई का मुआवजा नहीं मिलता, तब तक ट्रांसपोर्टिंग चालू नहीं होने दी जाएगी।”






















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