टॉर्च की रोशनी में 3 घंटे चला सर्च ऑपरेशन; आरोपी मां और पति हिरासत में, जीआरपी थाने में पूछताछ; पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल नहीं पहुंचा कोई परिजन
सरायकेला-खरसावां जिले से इंसानियत और ममता को पूरी तरह से तार-तार कर देने वाली एक बेहद सनसनीखेज, अमानवीय और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। चक्रधरपुर रेल मंडल के राजखरसावां और महालीमरूप रेलवे स्टेशन के बीच बुधवार की देर रात खरसावां थाना पुलिस और राजखरसावां जीआरपी ने रेलवे ट्रैक के किनारे पत्थरों के बीच से एक बेकसूर मासूम बच्ची का क्षत-विक्षत शव बरामद किया है।
आरोप है कि हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी एक्सप्रेस में सफर कर रही एक कलयुगी मां ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए अपनी ही चंद महीनों की मासूम बच्ची को चलती ट्रेन की खिड़की या दरवाजे से सीधे बाहर हवा में फेंक दिया। ऊंचाई और तेज रफ्तार ट्रेन से नीचे कंक्रीट-पत्थरों पर फेंके जाने के कारण मासूम बच्ची की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
आरोपी महिला मझगांव की रहने वाली; पति को भी हिरासत में लेकर आमने-सामने पूछताछ
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले अमानवीय कृत्य को अंजाम देने वाली आरोपी महिला पश्चिम सिंहभूम (चाईबासा) जिले के मझगांव क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही है। घटना के तुरंत बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला को हिरासत में ले लिया है, जिससे कड़ी पूछताछ की जा रही है।
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, पुलिस ने महिला के पति को भी हिरासत में ले लिया है और चक्रधरपुर या चाईबासा जीआरपी थाने में दोनों को आमने-सामने बैठाकर इस निर्मम हत्याकांड के पीछे की वजहों को खंगाला जा रहा है। हालांकि, रेल पुलिस के उच्च अधिकारियों द्वारा पति की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है। पुलिस यह सुराग लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर एक मां ने अपने ही जिगर के टुकड़े को मौत के घाट उतारने जैसा खौफनाक कदम क्यों उठाया? क्या यह किसी गहरे पारिवारिक विवाद का खूनी अंजाम है या महिला किसी मानसिक सनक/बीमारी का शिकार है।
टॉर्च की रोशनी में 3 घंटे तक रेलवे ट्रैक पर चला सघन सर्च ऑपरेशन
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बुधवार की देर शाम रेलवे के मुख्य कंट्रोल रूम को जनशताब्दी एक्सप्रेस के सजग यात्रियों या रेलकर्मियों के माध्यम से चलती ट्रेन से बच्चे को नीचे फेंके जाने की लाइव इनपुट (सूचना) मिली थी। कंट्रोल रूम ने बिना वक्त गंवाए इसकी सूचना तुरंत खरसावां थाना पुलिस और जीआरपी राजखरसावां को फ्लैश की।
सूचना मिलते ही खरसावां थाना प्रभारी गौरव कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल और जीआरपी के जांबाज जवान राजखरसावां और महालीमरूप स्टेशन के बीच स्थित सुनसान और घने अंधेरे वाले रेलवे ट्रैक पर उतरे। पुलिसकर्मियों ने हाथ में टॉर्च लेकर पटरी के चप्पे-चप्पे और झाड़ियों को खंगाला। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत, भारी जोखिम और खोजबीन के बाद देर रात सिमला गांव के पास डाउन रेलवे ट्रैक के किनारे से उस मासूम की लाश बरामद हुई।
सदर अस्पताल के मर्च्युरी फ्रीजर में सुरक्षित रखा गया शव; नहीं आया कोई अपना
रेलवे ट्रैक पर मिले क्षत-विक्षत शव को देखने से यह प्रतीत होता है कि मृत नवजात बच्ची की उम्र महज दो से तीन महीने के बीच रही होगी। खरसावां पुलिस ने विधिक व कागजी प्रक्रिया पूरी कर शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया।
मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली बात यह भी रही कि इस अभागी मासूम का पोस्टमार्टम कराने के लिए अस्पताल में मृतका के परिवार, ननिहाल या ददिहाल पक्ष से कोई भी सदस्य आंसू बहाने तक नहीं पहुंचा। पूरी तरह लावारिस पड़े शव का खरसावां पुलिस ने अपनी देखरेख में पोस्टमार्टम संपन्न कराया और अग्रिम पहचान व असली दावेदारों के इंतजार में शव को सरायकेला पोस्टमार्टम हाउस (मर्च्युरी) के सुरक्षित फ्रीजर में रखवा दिया है। इस घटना से पूरे कोल्हान और रेल महकमे में शोक और आक्रोश व्याप्त है।




















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