नए साल की शुरुआत उम्मीद से होती है, लेकिन कुछ परिवारों के लिए यह शुरुआत डर लेकर आई. नशे का कारोबार तेजी से फैल रहा है, गिरफ्तारियां भी हो रही हैं — पर सवाल वही, क्या असली गुनहगार पकड़े जा रहे हैं, या सिर्फ मोहरे?
चतरा (झारखंड): चतरा जिले का मयूरहंड प्रखंड इन दिनों नशे के सौदागरों की तस्करी का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। क्षेत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। पुलिस, SSB (सशस्त्र सीमा बल) और NCB (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) द्वारा बड़े स्तर पर छापेमारी और बरामदगी की जा रही है। हालांकि, यह कड़वी सच्चाई भी सामने आ रही है कि जिनकी गिरफ्तारी हो रही है, वे मुख्य तस्कर नहीं, बल्कि भाड़े पर काम करने वाले गरीब मजदूर हैं।
इन गिरफ्तार युवकों को यह तक पता नहीं होता कि वे किस सरगना का माल ढो रहे हैं, लेकिन जेल और लंबी सजा का दंश वही झेल रहे हैं।
📌 नववर्ष 2026 में बढ़ी हलचल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार: 1 जनवरी से 3 जनवरी 2026 के बीच, मयूरहंड और आसपास के गांवों से पुलिस ने कई युवकों को उनके घर से पूछताछ के लिए उठाया, जांच और पूछताछ की प्रक्रिया अब भी जारी है इस कार्रवाई के बाद गरीब अभिभावकों में भय और चिंता
😟 ग्रामीण परिवारों की पीड़ा
लगातार हो रही जांच और गिरफ्तारियों से: युवाओं के परिवार दहशत में! गरीब अभिभावक चिंतित कि कहीं उनके बच्चे गलत संगत या शक के आधार पर पुलिस कार्रवाई में न फंस जाएं, समाधान और पुनर्वास की नीति अब भी स्पष्ट नहीं
⚠️ नशा नेटवर्क का बढ़ता दायरा
अब यह नेटवर्क:
चतरा → मयूरहंड → पदमा थाना → इचाक थाना → इचाक से आगे
तक फैल चुका है, जो प्रशासन और समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
लेकिन अब तक: स्कूलों में नशा विरोधी जागरूकता अभियान नहीं, प्रशासन केवल जब्ती और गिरफ्तारी को उपलब्धि मान रहा, न समाजसेवी आगे, न जनप्रतिनिधि का बयान, युवा जा रहे जेल, समाधान नहीं मिल रहा
❓ जनता की आवाज
ग्रामीणों में एक ही सवाल गूंज रहा है:
“कब पकड़े जाएंगे असली सरगना?
कब रुकेगा नशे का गलियारा?
और कब मिलेगा युवाओं को जेल नहीं, समाधान?”





















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