कुंदा (चतरा): कुंदा प्रखंड मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर दूर स्थित गेंद्रा गांव, जो दो-तीन दशक पूर्व उग्रवादी और माओवादी गतिविधियों का शरणस्थली माना जाता था, एक बार फिर दहशत के साए में आ गया है। चतरा और पलामू जिले की सीमांत क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह इलाका लंबे समय तक नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। लगातार पुलिसिया दबिश और अभियानों के बाद उग्रवाद की जड़ें धीरे-धीरे कमजोर पड़ीं और गांव में अमन-चैन बहाल हो गया था। ग्रामीण खेती-बाड़ी और रोजमर्रा के कार्यों में शांतिपूर्वक जुटे हुए थे। लेकिन लंबे अरसे बाद आपसी रंजिश में हुए खूनी संघर्ष और गोलीकांड ने एक बार फिर गांव की शांति भंग कर दी है। घटना के बाद पूरे गांव में भय का माहौल व्याप्त है। शाम ढलते ही गलियां सुनसान हो जाती हैं और लोग अपने-अपने घरों में सिमटने को मजबूर हैं। जहां कभी शांति और सौहार्द का वातावरण था, वहां अब गोलियों की तड़तड़ाहट और वर्चस्व की लड़ाई ने ग्रामीणों का सुकून छीन लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि दो दशक पहले जिस गेंद्रा गांव में दिन के उजाले में भी नक्सलियों की धमक सुनाई देती थी, वह हाल के वर्षों में पूरी तरह सामान्य जीवन की ओर लौट चुका था। लेकिन हालिया घटना ने एक बार फिर लोगों के मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। इधर, कुंदा थाना प्रभारी प्रिंस कुमार सिंह लगातार गांव का दौरा कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरती जा रही है और ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।
खूनी संघर्ष से फिर दहशत में गेंद्रा गांव, वर्षों बाद टूटी शांति

On: December 31, 2025 12:47 AM

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