प्रतापपुर (चतरा)। प्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में लगभग 22 करोड़ की लागत से बने नवनिर्मित अस्पताल भवन का कार्य अंतिम चरण में है। अस्पताल भवन का अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन चहारदीवारी का करीब 30 प्रतिशत कार्य अस्पताल परिसर की जमीन पर अतिक्रमण के कारण अटका हुआ था। संवेदक की शिकायत पर अनुमंडल पदाधिकारी जहूर आलम के निर्देश पर प्रतापपुर अंचलाधिकारी विकास कुमार टुडु और थाना प्रभारी कासिम अंसारी ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को अतिक्रमण हटवाया। मौके पर ही संवेदक को शेष चहारदीवारी निर्माण शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया गया। सीओ और थाना प्रभारी ने स्पष्ट कहा कि अस्पताल की जमीन पूरी तरह सरकारी है, इसमें कोई भी बाधा डालेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। पुलिस और प्रशासन की उपस्थिति में शेष चाहरदीवारी का कार्य पूरा कराया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रतापपुर अस्पताल के लिए कुल 8 एकड़ जमीन चिन्हित है। उत्तर सीमाना पर कसमार गांव के रैयत कारू साव व दुखन साव की करीब 0.70 डिसमिल जमीन अस्पताल परिसर में शामिल कर दी गई है। वहीं दक्षिण और पश्चिम सीमाना पर अब भी अतिक्रमण बना हुआ है, जिस पर अब तक राजस्व विभाग ने कार्रवाई नहीं की है।इस बीच रैयत के वंशज सत्येंद्र प्रसाद ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके खाता संख्या 19, प्लॉट संख्या 145/207, रकबा 1.05 एकड़ जमीन को अस्पताल में जबरन ले लिया गया है। जमीन का बंटवारा, दाखिल-खारिज और ऑनलाइन रसीद भी हमारे पास है, फिर भी कोई मुआवजा या वैकल्पिक जमीन हमें नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि यदि दक्षिण और पश्चिम सीमाना की वास्तविक मापी कराई जाए तो असल अस्पताल की जमीन सुरक्षित की जा सकती है और उनकी जमीन बच सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल का निर्माण क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके लिए प्रभावित रैयतों को न्याय और मुआवजा भी मिलना चाहिए, तभी यह परियोजना विवादों से मुक्त हो पाएगी।
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