Home बिहार झारखंड देश-विदेश मनोरंजन खेल क्राइम शिक्षा राजनीति हेल्थ राशिफल
---Advertisement---

पर्यावरण दिवसः पौधारोपण का उत्सव या औपचारिकता की रस्म?

---Advertisement---
WhatsApp Group Join Now

प्रतापपुर (चतरा)। हर साल जब 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन सोशल मीडिया व्हाट्सएप पर सभी लंबी-लंबी बातें लिखते हैं और एक दूसरे को पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं भी देते हैं। पेड़ की कितनी आवश्यकता है हमारे जीवन में इस पर भी चर्चाएं खूब होती है। जन जागरूकता के लिए सरकारी निजी तौर पर कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं, स्कूलों में भाषण, दफ्तरों में शपथ और सोशल मीडिया पर पेड़ों के साथ सेल्फियां छा जाती हैं। पर सवाल यह है कि क्या यह पर्यावरण संरक्षण है या सिर्फ एक सालाना दिखावा?’ यदि यह सचमुच में पेड़ लगाने पेड़ के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम किए जाते हैं तो 2025 से पहले जहां पौधे लगाए गए वहां तो लगाया हुआ पौधा नाम कोई चीज या पेड़ है ही नहीं। मैं तो ऐसा समझता हूं कि जितने पौधे लगाए जा रहे हैं। उससे 10 गुना काटे जा रहे हैं। फिर क्या मतलब है ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन का। पेड़ लगाओ और उसका संरक्षण की कोई व्यवस्था ही नहीं हो। ’एक दिन की जागरूकता, 364 दिन की उदासीनता’ हमने तो देखा है आपने भी देखा होगा कि पर्यावरण दिवस के नाम पर उस दिन बड़े-बड़े पोस्टर लगाए जाते हैं। “पेड़ लगाएं, जीवन बचाएं”, “हरियाली ही खुशहाली” आदि। आम आदमी हो अधिकारी हो या कर्मचारी हो विद्यार्थी हो या शिक्षक हो या जनप्रतिनिधि हो सब पौधे लगाते हैं। कैमरे चमकते हैं, फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं, लेकिन कुछ ही दिनों बाद वही पौधे सूखे पत्तों के ढेर में तब्दील हो जाते हैं। पर्यावरण दिवस एक दिन नहीं, एक सतत अभियान होना चाहिए। जब तक पौधारोपण फोटो खिंचवाने की रस्म बना रहेगा, न जंगल बढ़ेंगे, न जीवन सुरक्षित होगा। समय है दिखावे से बाहर निकल कर नीति, ज़िम्मेदारी और निरंतरता की ओर बढ़ने का।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment